&w=896&h=504&format=webp&quality=medium)
Jaipur News: राजस्थान की कला और संस्कृति का धरोहर कहा जाने वाला जवाहर कला केंद्र इस समय सुर्खियों में है. वजह है- एक बड़ा प्रमोशन घोटाला, जहां नियम-कायदों को ताक पर रखकर कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई.
जवाहर कला केंद्र... राजस्थान की कला-संस्कृति का गढ़... लेकिन अब यहां से उठ रही है गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं की गूंज. दरअसल, जेकेके प्रशासन पर आरोप है कि बिना नियमावली और वित्त विभाग की अनुमति के ही पांच कर्मचारियों को पदोन्नति दे दी गई. क्यूरेटर को बना दिया गया अधीक्षक सह सहायक निदेशक और केयरटेकर को सीधे बना दिया गया उपमहाप्रबंधक लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जवाहर कला केंद्र के सेवा नियम बने ही नहीं हैं, तो इन पदोन्नतियों का आधार क्या था?
वित्त विभाग ने 13 अगस्त 2023 को एक स्पष्ट परिपत्र जारी किया था, जिसमें साफ कहा गया था कि प्रमोशन प्रक्रिया नियमों और अनुमति के दायरे में ही हो. लेकिन, महज एक महीने बाद- 18 सितंबर 2023 को प्रमोशन आदेश जारी कर दिए गए. और जब ये पदोन्नतियां की गईं, उस समय जवाहर कला केंद्र में गवर्निंग काउंसिल मौजूद थी, लेकिन न तो उनसे पूछा गया और न ही उनकी अनुमति ली गई. नियम साफ कहते हैं कि ऐसे मामलों में गवर्निंग काउंसिल की मंजूरी ज़रूरी है, फिर भी यह कदम उठा लिया गया.
इनका हुआ प्रमोशन
अब्दुल लतीफ उस्ता – क्यूरेटर से सहायक निदेशक
भरत सिंह – केयरटेकर से सीधे उप महाप्रबंधक (दो बार प्रमोशन)
अनिल चौधरी, अर्जुन मीणा और भैरूराम जांगिड
नियमों को दरकिनार कर पदोन्नति
यानी, केवल पद ही नहीं बढ़े... पे लेवल में भी अनियमित बढ़ोतरी कर दी गई. L-13 से L-14 और L-11 से L-12 तक वेतनमान बदल डाले गए. वित्त विभाग के संयुक्त सचिव सुरेश कुमार वर्मा का कहना है कि जवाहर कला केंद्र ने अभी तक अपने सेवा नियम ही प्रस्तुत नहीं किए हैं. ऐसे में नियमों के अभाव में पदोन्नति करना पूरी तरह गलत है.
उन्होने कहा- ये प्रमोशन पूरी तरह नियमों के विरूद्ध है. विभाग किसी भी पद को सेंशन करें, किसी भी पद को अपग्रेड करें, या डाउनग्रेड करें. वो खुद नहीं कर सकता. उनको वित्त विभाग से सेंशन करवाना पड़ेगा. 1999 से पहले तो उनके पास लिबर्टी थी लेकिन 1999 के बाद ये पावर उनके पास नहीं रही उनकी लिबर्टी खत्म हो गई. अब कोई भी डिपार्टमेंट कोई भी पद खुद सेंशन नहीं कर सकता फिर चाहे वो ऑटोनोमस बॉडी हो या फिर कोई डिपार्टमेंट. अब अगर वो फाईल वित्त विभाग के पास आती है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी
अतिरिक्त महानिदेशक जेकेके अलका मीणा ने ज़ी राजस्थान से बताया कि ये प्रमोशन बजट 2023-24 की घोषणा के हिसाब से किए गए हैं. राजस्थान सरकार ने 13 अगस्त 2023 को आदेश निकाले थे, उसी के आधार पर कला साहित्य संस्कृति और पुरातत्व विभाग ने ये प्रमोशन किए. ये सब नियमों के अनुसार और सरकार की मंजूरी से हुए थे.
वित्त विभाग ने कहा नियमों के विरूद्ध है और जेकेके ने कहा नियमों के अनुसार है . अब बड़ा सवाल यही है कि सही क्या है और कौन है? डॉक्यूमेंट्स सारे प्रमोशन प्रक्रिया के अगेंस्ट है तो फिर पूछा भी जाएगा कि आखिर वित्त विभाग के आदेशों को ताक पर रखकर प्रमोशन कैसे दिए गए? क्या यह सब मिलीभगत का खेल था? जेकेके प्रशासन औप संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी या नहीं? यह जांच का विषय है... और जनता के टैक्स से चलने वाले संस्थान में इस तरह के घोटाले गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं.
राजस्थान की ताज़ा ख़बरों के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहां पढ़ें Rajasthan Newsऔर पाएं Jaipur Newsकी हर पल की जानकारी. राजस्थान की हर खबर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार. जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!