राजस्थान में संपत्ति रजिस्ट्रेशन पर सख्ती, नकद लेनदेन पर अब लगेगा ताला

Rajasthan News: संपत्ति की खरीद-फरोख्त के दौरान काले धन के प्रवाह पर नकेल कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.

राजस्थान में संपत्ति रजिस्ट्रेशन पर सख्ती, नकद लेनदेन पर अब लगेगा ताला

Rajasthan News: राजस्थान में संपत्ति की खरीद-फरोख्त में कैश लेनदेन कम से कम हो इसके लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. प्रदेश के वित्त विभाग ने सभी रजिस्ट्री कार्यालय में एक पत्र जारी किया है. इसमें निर्देश दिए हैं कि आयकर अधिनियम के तहत 2 लाख रुपए से अधिक नकद लेनदेन पर रोक लगनी चाहिए. इसे संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया में ब्लैक मनी समाप्त करने की दिशा में कदम माना जा रहा है.

नए फरमान से जितनी भी रजिस्ट्री या संपत्ति का हस्तांतरण होगा, उनमें ब्लैक मनी का ट्रांजेक्शन नहीं हो, इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे. किसी भी रजिस्ट्री के समय अगर आयकर के नियमानुसार निर्धारित राशि से अधिक लेनदेन नकद हो रहा है तो पंजीयन विभाग के अधिकारी आयकर विभाग को सूचना देंगे. ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कदम उठाए जाएंगे.

दरअसल, राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने ओमप्रकाश बनाम राज्य व अन्य 28 याचिकाओं पर 21 मई 2025 को आदेश पारित करते हुए सभी लोक कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य कानूनी शुल्कों की वसूली में आपसी कॉर्डिनेशन के साथ काम करें. वित्त विभाग के शासन सचिव (राजस्व) कुमार पाल गौतम ने जारी परिपत्र में राजस्थान हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल 2025 को सिविल अपील संख्या 5200/2025 (द कॉरेस्पॉन्डेंस पीबीएएनएमएस एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाम बी. गुणाशेखर) का हवाला देते हुए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं.

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उन्होने साफ-साफ चेताते हुए कहा की यदि किसी सम्पत्ति लेनदेन में नकद भुगतान आयकर अधिनियम द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक होता है और यह जानकारी उप-रजिस्ट्रार के संज्ञान में आती है, तो उसे अनिवार्य रूप से संबंधित आयकर प्राधिकारी को सूचित किया जाना चाहिए. यदि उप-रजिस्ट्रार इस जानकारी को छुपाते हैं या रिपोर्ट नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

वित्त विभाग के सचिव कुमारपाल गौतम की ओर से जारी परिपत्र पर देखा जाए तो उन्होने सभी उप-रजिस्ट्रारों को निर्देशों की अक्षरशः पालना करने के निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट के पारित आदेश के क्रम में समस्त लोक कार्यालय, लोक प्राधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों पर स्टांप ड्यूटी व अन्य शुल्कों की वसूली एवं अन्य विधिक दायित्वों का निर्वहन करें. इसके लिए आपस में समन्वय स्थापित कर राजस्थान स्टांप अधिनियम 1998, भारतीय स्टांप अधिनियम 1899, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908, संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम 1882, भारतीय संविदा अधिनियम 1882 तथा आयकर अधिनियम 1961 के प्रावधानों की अक्षरक्षः पालना सुनिश्चित कराएं. परिपत्र में एक ओर उच्चतम न्यायालय से पारित आदेश का हवाला देते हुए निर्देश दिए हैं कि यदि किसी संव्यवहार में नकद लेनदेन के लिए आयकर अधिनियम की ओर से निर्धारित अधिकतम राशि से अधिक कैश लेनदेन का तथ्य उप रजिस्ट्रार के संज्ञान में आता है तो अविलंब आयकर विभाग के संबंधित प्राधिकारी को सूचित किया जाए.

खास बात यह है कि आयकर अधिनियम के अनुसार किसी भी संपत्ति के हस्तांतरण के लिए निर्धारित राशि 2 लाख तय है. ऐसे में अब खरीदार या बेचानकर्ता को 2 लाख से ऊपर की राशि का भुगतान नकद नहीं किया जाएगा, बल्कि चेक से ही लेनदेन होगा. ऐसा नहीं करने पर जुर्माना लग सकता है. आयकर विभाग आयकर अधिनियम की धारा 269-एसटी के तहत किसी व्यक्ति को एक ही दिन में एक ही व्यक्ति से 2 लाख से अधिक नकद राशि प्राप्त नहीं करनी चाहिए. आयकर विभाग को जब भी इस तरह की सूचना मिलती है, चाहे वह अदालत, रजिस्ट्रेशन विभाग या अन्य किसी स्रोत से हो, तो विभाग को कानून के अनुसार जांच करनी होगी. अगर पाया जाता है कि आयकर अधिनियम की धारा 269-एसटी का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित व्यक्ति पर जितनी राशि नकद में ली गई है, उतने ही जुर्माने का प्रावधान है. उदाहरण के तौर पर किसी भूखंड के बेचान नामा में विक्रय मूल्य 15 लाख रुपए पेश किया जाता है तो इसमें केवल 2 लाख रुपए तक का कैश भुगतान किया जा सकता है. शेष 13 लाख का चेक या आरटीजीएस किया जा सकता है.

बहरहाल, राज्य सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं. अब प्रॉपर्टी के नाम पर ब्लैक मनी की घुसपैठ बर्दाश्त नहीं होगी. चाहे खरीददार हो या रजिस्ट्रार, अब हर किसी को नियम मानने होंगे. वरना नियम तोड़ने की कीमत चुकानी पड़ेगी जुर्माने से लेकर सस्पेंशन तक. यह निर्णय न केवल कालेधन पर लगाम कसने में कारगर होगा, बल्कि पारदर्शिता और कर अनुपालन सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार का एक ठोस कदम है. अब संपत्ति बाजार में कैश ट्रांजेक्शन की जगह डिजिटल और बैंकिंग माध्यमों से ही लेनदेन किया जा सकेगा.

रिपोर्टर- दीपक गोयल

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