हरमाड़ा में 41 करोड़ का पेयजल प्रोजेक्ट जल्द शुरू होगा, 75 हजार आबादी को मिलेगा बीसलपुर का पानी

अतिरिक्त मुख्य अभियंता मनीष बेनीवाल का कहना है कि हरमाड़ा में पानी की दिक्कत है, इसलिए जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की कोशिश की जा जाएगी.

हरमाड़ा में 41 करोड़ का पेयजल प्रोजेक्ट जल्द शुरू होगा, 75 हजार आबादी को मिलेगा बीसलपुर का पानी
75 हजार आबादी को मिलेगा बीसलपुर का पानी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Jaipur: आमेर, खोनागोरियान और जामडोली के बाद अब हरमाड़ा को भी पेयजल की समस्या से निजात मिलेगी. हरमाड़ा में 41 करोड के पेयजल प्रोजेक्ट का काम जल्द शुरू होगा. पीएचईडी इंजीनियर्स की मानें तो शहर की बड़ी आबादी हरमाड़ा को अगले साल से बीसलपुर का पानी मिल सकेगा.

2 माह बाद शुरू होगा प्रोजेक्ट
शहर के पेयजल सप्लाई से प्रभावित इलाके मे हरमाड़ा भी बड़ी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां रोजाना पानी के लिए परेशान होना पड़ता है. लेकिन अगले साल से हरमाड़ा क्षेत्र की 75 हजार आबादी को इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा. सीएम ने हरमाड़ा के लिए 41 करोड़ की बजट घोषणा की थी, जिसे जलदाय विभाग अमलीजामा पहचाने में लगा है.

इस प्रोजेक्ट को अगले दो महीने में टेंडर जारी कर शुरू किया जाएगा. अतिरिक्त मुख्य अभियंता मनीष बेनीवाल का कहना है कि हरमाड़ा में पानी की दिक्कत है, इसलिए जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की कोशिश की जा जाएगी, सबकुछ ठीक रहा तो अगले साल से हरमाड़ा को बीसलपुर का पानी मिल सकेगा.

1 से सवा MLD अतिरिक्त पानी मिल पाएगा
इस प्रोजेक्ट के तहत मनसा माता के पास एक पंपहाउस और 3 पानी की टंकिया क्षेत्र में बनाई जाएगी और बीसलपुर की पेयजल लाइन डाली जाएगी. इसके साथ साथ हरमाड़ा में सालों से बंद पड़े 16 ट्यूबवेल को शुरू करने का काम भी तेजी से चल रहा है, ताकि यहां की बड़ी आबादी को राहत मिल सके. एक्सईएन पवन अग्रवाल का कहना है कि विश्चकर्मा 13 नंबर पर बंद ट्यूबवेल्स से शुरू होने से क्षेत्र में 1 से सवा एमएलडी पानी की मात्रा बढ़ेगी.

16 में से 5 ट्यूबवेल अगले महीने से शुरू होंगे
फिलहाल 41 करोड़ की स्कीम बनाकर जलदाय विभाग ने वित्त विभाग को भेज दी है. जल्द ही स्वीकृति मिलते ही काम शुरू किया जाएगा. हालांकि, 50 लाख की लागत से 16 ट्यूबवेल्स को फिर से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है, जिसमें से 5 ट्यूवेल्स अगले महीने से पानी दे सकेंगे. ऐसे में अब उम्मीद यही है कि जल्द अधिक से अधिक आबादी की प्यास बुझ पाए.