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Rajasthan Assembly Session: राजस्थान के विधानसभा में आज अतिवृष्टि और बाढ़ से तबाह हुई फसलों के मुआवजे की मांग को लेकर खूब हंगामा बरपा. विपक्ष ने वेल में आकर जमकर नारेबाजी की. सत्तापक्ष की ओर से आपदा राहत मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने जवाब भी दिया. विपक्ष के हंगामें के कारण किरोड़ी लाल मीणा पूरा जवाब तक नहीं दे पाए और सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
भारी बारिश और बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे की मांग पर आज विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ. सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सड़क पर ही विपक्ष ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिये थे. विधानसभा के बाहर विपक्षी विधायक नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में ट्रैक्टर पर सवार होकर आये. पश्चिमी द्वार पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
चौपट हुई फसलों को हाथ में लेकर प्रदर्शन किए. टीकाराम जूली ने ट्रैक्टर को विधानसभा में जबरन घुसाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के पुख्ता इंतजामों के आगे विपक्षी विधायकों को पैदल ही विधानसभा में आना पड़ा. विधानसभा के पोर्च में भी कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया और सरकार पर अन्नदाता की उपेक्षा के गंभीर आरोप लगाए.
सदन में अमित चाचाण, नरेंद्र बुडानिया के साथ नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मामले को जोर शोर से उठाया. सरकार की ओर से आपदा राहत मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने जवाब देना शुरू किया. किरोड़ी लाल ने अब तक हुए नुकसान की जानकारी सदन को दी.
जानकारी मुताबिक भारी बारिश और बाढ से अब तक 193 लोगों की मौत हुई है. 36 लोग घायल हुए हैं, 347 छोटे पशुओं की मौत हुई, 279 बड़े पशुओं ने भारी बारिश से दम तोड़ा, 1974 पक्के मकान ध्वस्त हुए, 752 कच्चे घर गिरे हैं. 1 करोड़ 4 लाख रुपये का मुआवजा सरकार ने अब तक मृतकों के आश्रितों को दिया है.
आपदा राहत मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि प्रदेश में इस साल बासठ फीसदी ज्यादा बारिश हुई है, जबकि 22 जिलों में असमान्य बारिश दर्ज की गई है, जहां लोगों के मकान गिरे है, वहां पर लोगों के लिए सरकार की ओर से आश्रय स्थल बनाये गये हैं, सरकार ने एक अगस्त से तबाह हुई फसलों की गिरदावरी का काम शुरू किया है, जैसे-जैसे रिपोर्ट आती जायेगी, खराबे के मुताबिक सरकार किसानों को उचित मुआवजा देगी.
विपक्ष के विधायक मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और वेल में जाकर लगातार नारेबाजी करते रहे. स्पीकर वासुदेव देवनानी ने पहले कई बार विपक्ष के विधायकों को कड़ी चेतावनी दी, लेकिन जब नौबत आपसी तनातनी की होती दिखी, तो स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.
बहरहाल, अतिवृष्टि और बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों पर विधानसभा में अन्नदाता की चिंता कम और राजनीतिक जोर आजमाइश ज्यादा दिखी. विपक्ष ने सरकार के जवाब को ही अनसुना किया, तो सत्तापक्ष इस मुददे पर मंत्री का जवाब पूरा दिलवा पाने में विफल रहा.
जाहिर है अन्नदाता की चिंता के बजाय विपक्ष सरकार को आरोपों के घेरे में खड़ा करने में जुटा रहा, तो सत्तापक्ष बेवजह विपक्ष के दबाव में आता दिखा. बेहतर यही था कि मंत्री का पूरा जवाब आ जाता, तो भजनलाल सरकार का किसानों और आम जनता के बीच सकारात्मक संदेश जा सकता था.
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