कांग्रेस का 'मिशन गुजरात', राजस्थान के कई नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी, देखें पूरी लिस्ट

Rajasthan News: दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान ने मिशन गुजरात के तहत संगठन सृजन अभियान को मजबूती देते हुए 43 AICC पर्यवेक्षकों और 7 सपोर्टिंग पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है. इस सूची में राजस्थान के कई वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है.

कांग्रेस का 'मिशन गुजरात', राजस्थान के कई नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी, देखें पूरी लिस्ट

Rajasthan Politics: कांग्रेस पार्टी ने अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए गुजरात में ‘संगठन सृजन अभियान’ को विस्तार देने का निर्णय लिया है. इस अभियान के तहत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने 43 पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं, जो गुजरात के विभिन्न जिलों में संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे. इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की ओर से 183 पर्यवेक्षकों को भी नियुक्त किया गया है. हर जिले में एक AICC पर्यवेक्षक की अगुवाई में चार PCC पर्यवेक्षकों की टीम गठित की गई है. यह टीम जिला कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति और चयन की पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करेगी.

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह पहल आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी के जमीनी ढांचे को सशक्त बनाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस मिशन के तहत राजस्थान से कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी गई है. इन नेताओं में हरीश चौधरी, बाबूलाल नागर, अर्जुन बामनिया, नीरज डांगी, हरीश चन्द्र मीणा, भजनलाल जाटव, कुलदीप इंदौरा, धीरज गुर्जर, इंदिरा मीणा, अमीन कागजी, जगदीश जांगिड़ और मनीषा पवार जैसे नेता शामिल हैं. ये सभी नेता गुजरात के विभिन्न जिलों में जाकर संगठन को सशक्त रूप देने का कार्य करेंगे.

सूत्रों के अनुसार, इन पर्यवेक्षकों की पहली बैठक 15 अप्रैल को गुजरात के अरावली जिले में होगी, जिसमें पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के शामिल होने की संभावना है. इस बैठक में संगठनात्मक रणनीति, कार्ययोजना, नियुक्ति प्रक्रिया और अभियान की दिशा पर विस्तृत चर्चा होगी.

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‘संगठन सृजन अभियान’ कांग्रेस पार्टी की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें जिला अध्यक्षों को संगठन की रीढ़ मानते हुए उन्हें अधिक सशक्त बनाने की बात कही गई है. राहुल गांधी ने भी 9 अप्रैल को अहमदाबाद में हुए अधिवेशन में इसे स्पष्ट रूप से रेखांकित किया था.

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