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Jaipur News: आषाढ़ शुक्ल एकादशी बुधवार को देवशयनी एकादशी के रूप में मनाई गई. शहर के मंदिरों में विभिन्न कार्यक्रम हुए. इस मौके पर भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम भगवान को चांदी की चारपाई पर सुलाने का भाव किया गया. श्रीहरि विष्णु सृष्टि की सत्ता के संचालन का भार भगवान भोलेनाथ को सौंपकर 118 दिन के लिए योग निद्रा में विश्राम करने चले गए हैं.
आदिदेव महादेव सृष्टि का कार्यभार दो नवंबर देवउठनी एकादशी तक अपने पास रखेंगे. आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में सुबह मंगला झांकी के बाद पांच बजे पंचामृत से ठाकुरजी का अभिषेक किया गया और लाल रंग की नटवर वेशभूषा धारण कराकर गोचारण लीला के आभूषण पहनाए. शाम 4:30 से 5:35 तक देवशयनी पूजन हुआ. इस दौरान पट बंद रहे.
भगवान शालिग्राम को चांदी के रथ में विराजमान कर दक्षिण-पश्चिम कोने स्थित तुलसा मंच ले जाया गया. उन्हें चांदी की खाट पर शयन कराकर पुन: मंदिर की परिक्रमा कर गर्भगृह में शयन का भाव कराया. गोविंददेवजी मंदिर में देवशयनी एकादशी और रविवार के चलते लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे. सभी भक्तों को दर्शन हो सकें और किसी तरह की परेशानी न हो इसलिए मंदिर प्रबंधन ने झांकियों का समय बढ़ाया. रोजाना करीब 3 घंटे झांकियों के दर्शन होते हैं.
रविवार को इसे दोगुना बढ़ाकर सवा छह घंटे किया गया है. मंगला झांकी 2:15 घंटे, धूप झांकी में पौने दो घंटे, संध्या झांकी एक घंटे और शयन झांकी के दर्शन आधे घंटे तक खुले रहे. सुबह मंगला झांकी से लेकर रात की शयन झांकी तक मंदिर के पट लगभग 11 घंटे खुले रहे.
हर दर्शन के बीच मात्र 15 मिनट के पट मंगल (अंतराल) के कारण दर्शन में व्यवधान नहीं हुआ. हालांकि नई व्यवस्था के कारण बुजुर्गों, विशेषयोग्यजनो को बीच में बैरियर होने से दूर से ही दर्शन करने पड़ें.
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