Rajasthan में गांवों के स्तर पर भी होगी पेयजल नमूनों की जांच, स्वच्छता समिति को मिलेंगे 'कैमिकल फील्ड टेस्टिंग किट'
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Rajasthan में गांवों के स्तर पर भी होगी पेयजल नमूनों की जांच, स्वच्छता समिति को मिलेंगे 'कैमिकल फील्ड टेस्टिंग किट'

पंत ने बैठक में जेजेएम की सपोर्ट गतिविधियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में करीब तीन हजार गांवों में वीडब्ल्यूएससी के गठन का बकाया कार्य शीघ्रता से पूरा करें. 

राजस्थान में गांवों के स्तर पर भी होगी पेयजल नमूनों की जांच.

Jaipur: जलदाय विभाग द्वारा प्रदेश में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत स्वीकृत ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं के माध्यम से गांव-गांव और ढ़ाणियों में लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए पेयजल गुणवत्ता जांच पर पूरा फोकस किया जा रहा है. इसके लिए प्रदेश के 43 हजार 362 गांवों के स्तर पर ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी-विलेज वाटर एंड सेनिटेशन कमेटी) के सदस्यों को 'केमिकल फील्ड टेस्टिंग किट' उपलब्ध कराई जाएगी. इसका उपयोग करते हुए जेजेएम में 'हर घर नल कनेक्शन' के माध्यम से पेयजल आपूर्ति में गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी. 

जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस)  सुधांश पंत ने बुधवार को शासन सचिवालय में राज्य स्तरीय क्रियान्वयन टीम के अधिकारियों के साथ बैठक में जेजेएम के तहत मेजर प्रोजेक्ट्स एवं रेग्यूलर विंग की सभी योजनाओं में पेयजल की गुणवत्ता जांच के पहलु पर भी पूरा ध्यान देने के निर्देश दिए. उन्होंने बैठक में प्रदेश में पेयजल गुणवत्ता जांच के लिए सभी जिला प्रयोगशालाओं के 'एनएबीएल एक्रीडिशन' तथा ब्लॉक स्तर पर प्रयोगशालाएं खोलने के कार्य की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की. 

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ब्लॉक स्तर पर बनेगी 102 प्रयोगशालाएं
बैठक में बताया गया कि अब तक प्रदेश में 11 जिलों जयपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, बूंदी, पाली, राजसमंद, श्रीगंगानगर और जोधपुर की जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं के 'एनएबीएल एक्रीडिशन' का काम पूरा कर लिया गया है. चार जिलों झुंझुनू, बाड़मेर, हनुमानगढ़ एवं चुरू की जिला प्रयोगशालाओं के 'एनएबीएल एक्रीडिशन' के लिए ऑडिट हो चुकी है. शेष जिलों की ऑडिट का काम आगामी जुलाई माह में पूरा कर सभी जिला प्रयोगशालाओं को 'एनएबीएल एक्रीडेट' करने की दिशा में सतत कार्रवाई की जा रही है. इसके अलावा JJM की गाइडलाइन के अनुसार राज्य में 102 पंचायत समिति मुख्यालयों पर चालू वित्तीय वर्ष में लेबोरेट्रीज स्थापित करने का कार्य भी प्रगति पर है.  

एस्कैप रिजर्वायर्स पर चर्चा
बैठक में प्रदेश में (जेजेएम) के तहत इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) क्षेत्र के जिलों में एस्कैप चैनल्स के पानी को रिजवॉयर्स में संग्रहित करते हुए इसे अतिरिक्त स्रोत के रूप में काम में लेने पर भी मंथन किया गया. एसीएस पंत ने चुरू, बीकानेर और जोधपुर रीजन के प्रोजेक्ट्स क्षेत्र में एस्कैप रिजर्वायर्स के मुद्दे पर अधिकारियों को जल संसाधन विभाग के साथ समन्वय से कार्यवाही करने के निर्देश दिए.

उन्होंने राज्य स्तरीय योजना स्वीकृति समिति (SLSSC) की बैठकों में मंजूर कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की. तकनीकी स्वीकृतियों एवं निविदाओं के बकाया कार्य को पूरा कर वार्षिक योजना के लक्ष्यों के अनुसार कार्यादेश जारी करने तथा इस माह के अंत में प्रस्तावित एसएलएसएससी की बैठक के लिए नए प्रस्ताव भी जल्दी से मंगवाने के निर्देश दिए.  

सपोर्ट गतिविधियों की समीक्षा
पंत ने बैठक में जेजेएम की सपोर्ट गतिविधियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में करीब तीन हजार गांवों में वीडब्ल्यूएससी के गठन का बकाया कार्य शीघ्रता से पूरा करें. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के अनुरूप इनमें महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए. 

उन्होंने 'विलेज एक्शन प्लान' और 'डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान' बनाने के काम में तेजी लाने, वीडब्ल्यूएससी के सदस्यों के प्रशिक्षण सहित सभी जिलों में सहायक गतिविधियों के विस्तार के लिए शेष बचे छः जिलों में आईएसए (इम्पलीमेंटेशन सपोर्ट एजेंसीज) के चयन का कार्य भी एक सप्ताह में पूर्ण करने के निर्देश दिए. साथ ही जिन 27 जिलों में आईएसए का चयन हो चुका है, वहां जन सहभागिता गतिविधियों को सतत रूप से संचालित करने के निर्देश दिए.

बैठक में बताया गया कि राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (एसपीएमयू-स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) के चयन के बाद टीम के सदस्य जयपुर पहुंच गए हैं, यह प्रोजेक्ट क्रियान्वयन गतिविधियों में राज्य स्तरीय क्रियान्वयन टीम का सहयोग करेगी. प्रदेश में अब तक 40 हजार 303 गांवों में वीडब्ल्यूएससी का गठन हो चुका है. इस समिति के 33 हजार 111 सदस्यों को प्रशिक्षण भी दिया गया है. एसीएस ने सभी जिलों में जिला स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (डीपीएमयू-डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) के चयन की प्रक्रिया को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए. 

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सघन मॉनिटरिंग से लाए प्रगति में सुधार
एसीएस ने कहा कि जेजेएम की सभी प्रक्रियाओं के लिए टाइमलाइन निर्धारित कर आगे बढ़ने के सकारात्मक परिणाम सामने आए है, इसी प्रकार प्रदेश में वृहद पेयजल परियोजनाओं के कार्यों के लिए भी 'टाइम शेड्यूल' बनाए. उन्होंने पूरे राज्य में लगातार सघन मॉनिटरिंग से लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति में सुधार लाने के भी निर्देश दिए. 

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