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Jaipur News: जयपुर के आमेर में स्थित सफेद आकड़े (श्वेतार्क) के दुर्लभ गणेश मंदिर को चमत्कारी मान्यता प्राप्त है. इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां विराजमान गणपति की मूर्ति सफेद आकड़े के पौधे की सौ साल पुरानी जड़ से उत्पन्न हुई है, जिसे भगवान गणेश का साक्षात स्वरूप माना जाता है.
मंदिर के महंत चंद्रमोहन याज्ञिक के अनुसार, यह मूर्ति 450 साल पुरानी है और इसकी स्थापना मानसिंह प्रथम ने की थी. युद्धकाल में राजा-महाराजा इस मंदिर की पाषाण मूर्ति को साथ ले जाकर विजय की कामना से पूजा करते थे, जबकि सफेद आकड़े की मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता था.
मंदिर 18 प्राचीन स्तंभों पर खड़ा है, जिसमें दो मूर्तियां स्थित हैं- ऊपरी मूर्ति सफेद आकड़े की और निचली मूर्ति पाषाण की है. इन दोनों मूर्तियों की सूंड बांई ओर है और ये पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए हैं, इसलिए इन्हें सूर्यमुखी गणेश भी कहा जाता है.
महंत ने बताया कि जो श्रद्धालु लगातार तीन बुधवार यहां आते हैं, उनकी हर मनोकामना पूरी होती है. कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों के मरीज भी यहां श्रद्धा से आते हैं और ठीक होने की कथाएं जनश्रुति में प्रचलित हैं.
इतिहास में यह भी उल्लेख है कि मानसिंह जब इस मूर्ति को हिसार के हस्तिनापुर से आमेर लाए थे, तब वहां के राजा ने इसे वापस मंगवाने के लिए घुड़सवार भेजे थे, लेकिन मूर्तियों को देख वे चकित रह गए और दोनों बालस्वरूप प्रतिमाएं आमेर में ही छोड़ दी गई.
गणेश चतुर्थी पर यहां विशाल मेला भरता है और आमेर कुंडा से निकलने वाली शोभायात्रा का समापन भी इस मंदिर पर होता है. आज भी विवाह और अन्य शुभ कार्यों के निमंत्रण पत्र डाक या कोरियर से गणपति को भेजे जाते हैं.
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