ट्रांसजेंडर कानून पर हाईकोर्ट में सुनवाई, जानें किन प्रावधानों के लिए केंद्र सरकार को नोटिस किया जारी

Rajasthan High Court Transgender Case: राजस्थान के जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने पूछा है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण संशोधन अधिनियम 2026 के कुछ प्रावधानों को क्यों न रद्द किया जाए, क्योंकि वे समुदाय के हितों के विपरीत बताए जा रहे हैं.

ट्रांसजेंडर कानून पर हाईकोर्ट में सुनवाई, जानें किन प्रावधानों के लिए केंद्र सरकार को नोटिस किया जारी
Image Credit: Rajasthan High Court

Rajasthan High Court Transgender Case: राजस्थान हाईकोर्ट ने केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव और केन्द्रीय विधि सचिव को नोटिस जारी कर पूछा है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण संशोधन अधिनियम 2026 के कुछ प्रावधान इस समुदाय के हितों के विपरीत होने के कारण क्यों ना उनको रद्द कर दिया जाए. एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश नई भोर संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए.

याचिका में अधिवक्ता मितुल जैन ने अदालत को बताया कि केन्द्र सरकार ने ट्रासजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण संशोधन अधिनियम 2019 के कुछ प्रावधानों में बदलाव कर इस साल संशोधन अधिनियम लागू किया है. इस संशोधन अधिनियम के कई प्रावधान ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के खिलाफ है. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के केस में व्यवस्था दी थी कि ट्रांसजेंडर अपने आप को ट्रांसमैन या ट्रांसवुमन मान सकता है.

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वहीं पुराने कानून में भी इसी तरह की व्यवस्था थी. याचिका में कहा गया कि संशोधन अधिनियम में प्रावधान किया गया है कि अब संबंधित जिले का सीएमएचओ की अध्यक्षता वाला मेडिकल बोर्ड ट्रांसजेंडर व्यक्ति की मेडिकल जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट स्थानीय कलेक्टर को देगा. वहीं कलेक्टर ट्रांसजेंडर व्यक्ति को प्रमाण पत्र जारी करेगा. ऐसे में इस प्रावधान से ट्रांसजेंडर व्यक्ति के स्वकल्पित लिंग पहचान के अधिकार को समाप्त हो गया है और वह प्रमाण पत्र के आधार पर अपनी पहचान मानने के लिए बाध्य है.

इसी तरह इस कार्रवाई से उनकी पहचान उजागर होगी, जो निजता के अधिकार के खिलाफ है. याचिका में यह भी कहा गया कि संशोधन अधिनियम उन व्यक्तियों को भी बाहर कर देता है, जिन्होंने सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी करा ली है या हार्मोनल थेरेपी ले रहे हैं. ऐसे में सशोधन अधिनियम से इन्हें प्रावधानों को हटाया जाए, जिसपर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

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Aman Singh

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