Jaipur News: DGP से कोर्ट का सीधा सवाल - '6 साल में एक बच्चा नहीं मिला, तकनीक का क्या फायदा?'

Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने आज पुलिस महानिदेशक को विभाग के द्वारा जांच के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला तरीके पर विचार करने को कहा है. कोर्ट के अनुसार पुलिस मॉडर्न तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर रही है.

Jaipur News: DGP से कोर्ट का सीधा सवाल - '6 साल में एक बच्चा नहीं मिला, तकनीक का क्या फायदा?'
Image Credit: rajasthan police dgp

Jaipur News: राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को कहा है कि राजस्थान पुलिस की जांच का ढर्रा अभी भी पुरानी तरह से ही चल रहा है. आज ए आई सहित मॉर्डन तकनीक आ गई है, लेकिन पुलिस उसका उपयोग नहीं कर रही है. अदालत ने कहा कि लापताओं की तलाश के लिए उन्नत तकनीक का उपयोग किया जाए. जस्टिस अवनीश झींगन और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश नरेंद्र सिंह रावत अन्य की और से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए.

डीजीपी कोर्ट में हुए पेश

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सुनवाई के दौरान डीजीपी राजीव शर्मा अदालत में पेश हुए. अदालत ने उन्हें कहा कि पुलिस लापता की तलाश की जांच मोबाइल तक ही सीमित रखती है. आजकल का युवा मोबाइल की तकनीक को भली-भांति समझता है. वहीं यदि पुलिस को जानकारी मिलती है कि आरोपी सुदूर इलाके में है तो पुलिस यहां से टीम बनाकर भेजती है. जब तक पुलिस वहां पहुंचती है, आरोपी वहां से निकल जाता है. यदि पुलिस उचित तकनीक काम में ले तो स्थानीय पुलिस की मदद से कुछ मिनट में ही आरोपी को पकड़ा जा सकता है.

एक मामले का दिया उदाहरण

अदालत ने एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि 2 साल के बच्चे की तलाश 6 साल बाद भी जारी है, लेकिन पुलिस के पास उसका स्केच तक नहीं है. ऐसे में पुलिस किस आधार पर जांच कर रही है, यह समझ के परे है. अदालत ने यह भी कहा कि मामलों की सुनवाई के दौरान कोर्ट के ऑब्जरवेशन को जांच अधिकारी अदालत का निर्देश समझ लेते हैं, जो भी उचित नहीं है. अदालत ने डीजीपी को कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि आपके कार्यकाल में कुछ अच्छा हो जाए.

लापताओं की तलाश नई तकनीक से

डीजीपी ने अदालत को कहा की लापताओं की तलाश नई तकनीक से की जाती है. वहीं अब अदालत की मंशा को देखते हुए मॉडल तकनीक काम में लाई जाएगी. अदालत में खाटू श्यामजी इलाके से लापता हुए 40 वर्षीय व्यक्ति के मामले में नामजद व्यक्ति की सहमति से उसका पॉलीग्राफ टेस्ट करने को कहा है. वहीं अदालत ने मामले में 10 दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा है.

कुछ मामलों के बारे में बोला कोर्ट

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में अधिवक्ता नगेंद्र सिंह ने बताया कि अप्रैल 2024 में उसका भाई खाटू श्याम जी इलाके से लापता हुआ था. इसे लेकर स्थानीय पुलिस थाने में नामजद रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी. इसके बावजूद अभी तक पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है. वहीं एक अन्य मामले में अधिवक्ता एसएस अली ने बताया कि रामगंज थाना इलाके से 6 फरवरी 2024 को 15 वर्षीय किशोरी लापता हुई थी. आरोपी युवक का घर पीड़िता के घर के सामने ही है. पुलिस को नामजद रिपोर्ट देने के बाद भी अब तक पुलिस ने पीड़िता की बरामद की नहीं की है. दूसरी ओर संबंधित युवक के परिजनों ने भी युवक के लापता होने की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है. जिससे जाहिर है कि युवक के परिजनों को युवक को लेकर जानकारियां हैं.

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