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Rajasthan illegal Mining: राजस्थान में अवैध खनन को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के बावजूद, खान विभाग के अधिकारियों की ढिलाई के चलते प्रदेश को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है. आश्चर्यजनक रूप से, कई मामलों में खान विभाग से अधिकृत लीजधारक ही निर्धारित सीमा से अधिक या बाहरी क्षेत्रों में अवैध खनन कर रहे हैं, और विभाग कार्रवाई करने से कतरा रहा है.
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नीमकाथाना और सीकर में करोड़ों का घोटाला
नीमकाथाना और सीकर में अवैध खनन के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जहां लीजधारकों ने रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा से कहीं अधिक खनन किया है:
नीमकाथाना (भराला): लीजधारक पर लीज से बाहर 1.15 लाख टन चेजा पत्थर के अवैध खनन का आरोप है. पूरी लीज में भी 3.20 लाख टन अवैध खनन का आरोप है. इस पर ₹17.78 करोड़ का जुर्माना लगना चाहिए, लेकिन सहायक खनि अभियंता अशोक वर्मा ने 5 महीने बाद भी न तो पैनल्टी लगाई और न ही ड्रोन सर्वे कराया.
सीकर (भेरा लुहारवास): यहां एक लीजधारक पर 3.70 लाख टन के रिकॉर्ड के मुकाबले, मौके पर 14 लाख टन खनन करने का आरोप है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह लगभग 10.30 लाख टन अधिक है, जिस पर लगभग ₹56 करोड़ का जुर्माना होना चाहिए. खनि अभियंता सीएल सेन शिकायत के बावजूद जांच में ढिलाई बरत रहे हैं.
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जयपुर में जुर्माना लगा, वसूली शून्य
जयपुर के जमवारामगढ़ स्थित साईवाड़ लीज में विभाग ने ₹6.14 करोड़ का जुर्माना तो लगाया, लेकिन एक साल बाद भी वसूली शून्य है. यहां लीजधारक ने आवंटित जगह पर कम और अन्य स्थान पर ज्यादा खनन किया था.
हालांकि, जयपुर के बस्सी स्थित हाथीपुरा खदान के मामले में विभाग ने सख्ती दिखाते हुए ₹13.87 करोड़ का जुर्माना लगाया है और वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जहां ₹7 लाख रुपए जमा भी हो चुके हैं.
खान विभाग यदि इन गंभीर मामलों में सख्ती से जांच और कार्रवाई करे, तो राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व मिल सकता है और मुख्यमंत्री की मंशा पूरी हो सकती है.
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