Rajasthan News: जयपुर में 10 हिंदू पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र दिए गए. वर्षों से बेमुल्क ज़िंदगी जी रहे इन लोगों को अब भारत ने कानूनी पहचान और आत्मीय अपनापन दिया. भारत सरकार की यह पहल वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करती है.
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Jaipur News: एक वो मुल्क जहां सिर्फ धर्म के नाम पर पहचाने जाते थे. और एक ये देश भारत जहां पहचान अब इंसान की है, नागरिक की है. हिंदू पाक विस्थापितों के चेहरे खिले हुए हैं. क्योंकि आज उन्हें सिर्फ दस्तावेज नहीं, अपनी मिट्टी से एक वैधानिक नाता मिला है. जयपुर में प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल और जिला कलेक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने 10 हिंदू पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र सौंपा.
नागरिकों के लिए एक भावुक लम्हा
जयपुर में एक भावुक लम्हा जब पाकिस्तान से विस्थापित 10 लोगों को मिला भारतीय नागरिकता का सर्टिफिकेट. प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल और कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने जब अपने हाथों से 10 हिंदू पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र सौंप रहे थे. तब वहां सिर्फ दस्तावेज़ नहीं बंट रहे थे वो "भरोसा" बांटा जा रहा था. वो भरोसा कि अब कोई पूछेगा नहीं कहां से आए हो? बल्कि कहेगा घर आ गए हो. वो लोग जो सालों तक बेमुल्क रहे आज भारत की मिट्टी के कानूनी हिस्सेदार बन गए. ये सिर्फ एक सर्टिफिकेट नहीं ये पहचान है, ये सम्मान है, और सबसे बढ़कर ये है आज़ादी की सांस.
विस्थापितों के चेहरों पर चमक
वर्षों से बेमुल्क ज़िंदगी जी रहे पाक विस्थापितों के चेहरों पर आज जो चमक है, वो किसी सुनहरी सुबह जैसी है. क्योंकि अब वो सिर्फ मेहमान नहीं अब वो हमारे भारतवासी हैं. इन चेहरों पर आई मुस्कान जो बरसों से दबे दर्द से होकर निकली है. ये वो आंसू हैं, जो आज खुशी की वजह से बह रहे हैं. संगीता और हरीचंद अब सिर्फ पति-पत्नी नहीं, बल्कि भारतीय नागरिक हैं. संतोष, सुनीत और राजकुमारी तीन भाई-बहन जो एक साथ अब 'भारत के वासी' कहलाने लगे हैं. चमेली, मुकेश, कलियां देवी, कंवरलाल, खिआना माहेश्वरी सिर्फ नाम नहीं, ये वो लोग हैं जिनके लिए ये दिन जिंदगी की सबसे बड़ी जीत बन गया.
दस्तावेज नहीं दास्तां हैं
अब ये चेहरें 'दस्तावेज़' नहीं, 'दास्तां' हैं. उनकी आंखों में अब कोई खौफ नहीं केवल उम्मीद की चमक है. उनकी मुस्कुराहट सिर्फ खुशी की नहीं, बरसों के दर्द की रिहाई है. भारत ने उन्हें दिल से अपनाया है. वो दिन जब किसी के नाम के साथ सिर्फ "रिफ्यूजी" जुड़ता था. वो घर जहां सुबह की आरती के स्वर भी डर के साए में दब जाते थे. वो ज़िंदगी जिसमें धर्म 'पिंजरा' था और इंसान होना गुनाह और फिर आया वो दिन जब जयपुर में भारत माता की जय के नारों के बीच 10 चेहरों को ज़िंदगी का सबसे बड़ा तोहफा मिला भारतीय नागरिकता की 'पहचान'. ये कोई आम प्रमाणपत्र नहीं था. ये वो कागज था, जिसने पाकिस्तान से विस्थापित हिंदू परिवारों की सालों की तकलीफों, दर-ब-दर की ठोकरों और "बेमुल्क" जैसी स्थिति को खत्म कर दिया. अतिरिक्त जिला कलक्टर संतोष मीना ने बताया की 2017 से अब तक 1955 के नागरिकता अधिनियम के तहत 340 हिंदू पाक विस्थापितों को सिर्फ भारतीय नागरिकता का सर्टिफिकेट नहीं, 'भरोसे का वजूद' दिया है. यह है भारत सरकार की उस सोच का हिस्सा, जहां हर पीड़ित को मिलती है सुनवाई, संरक्षण और सशक्तिकरण.
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