&w=896&h=504&format=webp&quality=medium)
Jaipur News: केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ''बाल विवाह मुक्त भारत'' के लिए 100 दिनों का राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किया है. इसका शुभारंभ ने गुरुवार से नई दिल्ली के विज्ञान भवन से किया गया.
इस दौरान राजस्थान में बाल अधिकारिता आयुक्त आशीष मोदी ने बताया कि राज्य स्तर पर सभी अधिकारियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों, पंचायती राज प्रतिनिधियों और सिविल सोसाइटियों ने ऑनलाइन भागीदारी की. साथ ही, बाल विवाह मुक्त राजस्थान बनाने का संकल्प लिय. यह अभियान 8 मार्च 2026 महिला दिवस तक चलेगा. इस दौरान स्कूलों, धार्मिक नेताओं और ग्राम पंचायतों पर फोकस रहेगा.
राजस्थान में बाल विवाह की चुनौती
भारत में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार 23.3% है, जबकि राजस्थान में यह 25.4% है. यह दर NFHS-4 सर्वेक्षण के दौरान के 35.4% से घटी जरूर है, लेकिन अभी भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर बनी हुई है. राज्य के 22 जिले जैसे चित्तौड़गढ़ (42.6%), भीलवाड़ा (41.8%), झालावाड़ (37.8%) और टोंक हाई-रिस्क हैं, जहां हर तीसरी महिला 18 वर्ष से पहले विवाहित हो चुकी है. अप्रैल 2025 में शुरू हुए ''बाल विवाह मुक्त राजस्थान'' अभियान ने जमीनी स्तर पर 2.5 लाख सदस्यों और 3 लाख छात्रों से संवाद स्थापित किया, लेकिन गहरी सामाजिक जड़ों के कारण प्रगति सीमित दिख रही है.
क्या अभियान राजस्थान को मुक्त कर पाएगा?
राजस्थान ने इसके लिए सभी विभागों को एकजुट कर मिशन शुरू किया है. उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के नेतृत्व में पंचायती राज, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग इस अभियान में शामिल है. इससे पिछले वर्षों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई. फिर भी, जहां चित्तौड़गढ़ जैसे जिलों में 42% दर बनी हुई है, वहां सामाजिक मानदंडों, गरीबी और लैंगिक असमानता की गहरी जड़ें चुनौती बनी हुई हैं. सवाल उठता है कि क्या यह 100 दिवसीय अभियान, जो जन आंदोलन पर जोर देता है, राजस्थान को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बना पाएगा या केवल अस्थाई जागरूकता तक सीमित रहेगा .
राजस्थान की ताज़ा ख़बरों के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहां पढ़ें Rajasthan News और पाएं Jaipur News हर पल की जानकारी. राजस्थान की हर खबर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार. जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!