सवालों के घेरे में राजस्थान! 100 दिन का अभियान, क्या खत्म हो पाएगी सबसे खतरनाक कुरीति?

Rajasthan News: केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने “बाल विवाह मुक्त भारत” के लिए 100 दिन का अभियान शुरू किया. राजस्थान में अधिकारियों ने ऑनलाइन जुड़कर संकल्प लिया. राज्य में बाल विवाह दर 25.4% है और कई जिले हाई-रिस्क हैं. अभियान का लक्ष्य 8 मार्च 2026 तक जागरूकता बढ़ाना है.

सवालों के घेरे में राजस्थान! 100 दिन का अभियान, क्या खत्म हो पाएगी सबसे खतरनाक कुरीति?
Image Credit: rajasthan child marriage

Jaipur News: केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ''बाल विवाह मुक्त भारत'' के लिए 100 दिनों का राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किया है. इसका शुभारंभ ने गुरुवार से नई दिल्ली के विज्ञान भवन से किया गया.

इस दौरान राजस्थान में बाल अधिकारिता आयुक्त आशीष मोदी ने बताया कि राज्य स्तर पर सभी अधिकारियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों, पंचायती राज प्रतिनिधियों और सिविल सोसाइटियों ने ऑनलाइन भागीदारी की. साथ ही, बाल विवाह मुक्त राजस्थान बनाने का संकल्प लिय. यह अभियान 8 मार्च 2026 महिला दिवस तक चलेगा. इस दौरान स्कूलों, धार्मिक नेताओं और ग्राम पंचायतों पर फोकस रहेगा.

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राजस्थान में बाल विवाह की चुनौती
भारत में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार 23.3% है, जबकि राजस्थान में यह 25.4% है. यह दर NFHS-4 सर्वेक्षण के दौरान के 35.4% से घटी जरूर है, लेकिन अभी भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर बनी हुई है. राज्य के 22 जिले जैसे चित्तौड़गढ़ (42.6%), भीलवाड़ा (41.8%), झालावाड़ (37.8%) और टोंक हाई-रिस्क हैं, जहां हर तीसरी महिला 18 वर्ष से पहले विवाहित हो चुकी है. अप्रैल 2025 में शुरू हुए ''बाल विवाह मुक्त राजस्थान'' अभियान ने जमीनी स्तर पर 2.5 लाख सदस्यों और 3 लाख छात्रों से संवाद स्थापित किया, लेकिन गहरी सामाजिक जड़ों के कारण प्रगति सीमित दिख रही है.

क्या अभियान राजस्थान को मुक्त कर पाएगा?
राजस्थान ने इसके लिए सभी विभागों को एकजुट कर मिशन शुरू किया है. उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के नेतृत्व में पंचायती राज, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग इस अभियान में शामिल है. इससे पिछले वर्षों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई. फिर भी, जहां चित्तौड़गढ़ जैसे जिलों में 42% दर बनी हुई है, वहां सामाजिक मानदंडों, गरीबी और लैंगिक असमानता की गहरी जड़ें चुनौती बनी हुई हैं. सवाल उठता है कि क्या यह 100 दिवसीय अभियान, जो जन आंदोलन पर जोर देता है, राजस्थान को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बना पाएगा या केवल अस्थाई जागरूकता तक सीमित रहेगा .

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SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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