Rajasthan News : ऑडिट कमेटी की नहीं हो रही बैठक, दोषियों को मिल रहा है फायदा
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Rajasthan News : ऑडिट कमेटी की नहीं हो रही बैठक, दोषियों को मिल रहा है फायदा

प्रदेश में विभागीय ऑडिट कमेटी की बैठकें नहीं होने से लापरवाह और भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों की पौबारह हो रही है. 

Rajasthan News : ऑडिट कमेटी की नहीं हो रही बैठक, दोषियों को मिल रहा है फायदा

Jaipur : प्रदेश में विभागीय ऑडिट कमेटी की बैठकें नहीं होने से लापरवाह और भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों की पौबारह हो रही है. ऑडिट कमेटी की बैठक नहीं होने से गबन या अनुशासनात्मक कार्रवाई के ऑडिट पैरा का निस्तारण समय पर नहीं हो पा रहा है और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों को फायदा मिल रहा है. हालात यह है कि प्रमुख सचिव वित्त अखिल अरोड़ा ने विभागों के आला अफसरों को ऑडिट कमेटी की बैठक कराने के लिए लिखा है. 

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प्रदेश में सरकारी विभागों में लेनदेन के सभी प्रकरणों की ऑडिट करवाई जाती है. इनमें किसी भी प्रकार की वित्तिय अनियमित्ता होने पर ऑडिट पैरा बनाया जाता है. ऑडिट पैरा के आधार पर दाेषी अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है. मामले में गबन की गई राशि की वसूली की कार्रवाई भी होती है. राज्य सरकार (Rajasthan Government) की ओर से सभी विभागों में ऑडिट कमेटी बनाई हुई है. इस कमेटी में विभागीय अधिकारियों के अलावा महालेखाकार के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल होते हैं. इस कमेटी की बैठक तय समय पर होनी चाहिए जिससे मामलों का निस्तारण होता रहे, लेकिन पिछले लम्बे समय से कई विभागों में ऑडिट कमेटी की बैठकें ही नहीं हो पाई. इधर प्रमुख शासन सचिव वित्त अखिल अरोड़ा (Principal Secretary to Government Finance Akhil Arora) ने सभी अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव को ऑडिट समिति की बैठके निर्धारित समयावधि में आयोजित कराने के निर्देश दिए हैं.

- ऑडिट कमेटियों की साल में चार बैठकें त्रैमासिक रूप से आयोजित करवाना अनिवार्य है.
- इसके लिए मुख्य सचिव और प्रधान महालेखाकार के बीच हुई बैठक में  निर्णय लिया गया था.
- इधर विभाग निर्धारित संख्या में ऑडिट कमेटियों की बैठक नहीं कर रहे हैं.
- विभागों के समय पर बैठकें नहीं करने का सीएजी प्रतिवेदनों में भी उल्लेख किया जाता है.
- इधर जन लेखा समिति भी ऑडिट कमेटी की निर्धारित बैठकें आयोजित नहीं कराने पर गंभीरता दिखा चुकी है.
- हालात यह है कि पिछले एक साल में विभागों को चार बैठकें करनी थी, लेकिन कुछ विभागों ने एक भी बैठक नहीं की.
- पीएचईडी, भूजल विभाग, प्रवासी भारतीय विभाग, सैनिक कल्याण, विधि न्याय विभाग, संसदीय कार्य विभाग, यूडीएच, कला संस्कृति, पर्यावरण सहित कई विभागों में एक भी बैठक नहीं हुई.
- इनके अलावा ज्यादातर विभागों में एक-दो बैठकें ही हो पाई है.
- केवल पंचायतीराज, कार्मिक और जलग्रहण विभाग ही चारों बैठक करवाने में सफल रहे हैं.
- ऑडिट कमेटी की बैठक नहीं होने से मामला लम्बित रहता है और इस बीच कार्मिक रिटायर हो गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई के कई मामले अटक जाते हैं.
- दूसरी ओर रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी से वसूली भी मुश्किल से ही हो पाती है.
- ऐसे में सरकार को राशि अपलेखन करना पड़ता है, जिसमें विभागीय श्रम के साथ आर्थिक नुकसान भी होता है.

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