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Jaipur Nagar Nigam: जयपुर शहर की राजनीति में नई बिसात बिछ चुकी है. 150 वार्डों के परिसीमन की अधिसूचना जारी होते ही अब सबकी निगाहें महापौर की लॉटरी पर टिक गई हैं. किसके हिस्से आएगी कुर्सी और किस वार्ड से तय होगी जीत-हार की गिनती यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है. माना जा रहा है कि नवंबर में वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होते ही प्रशासक की नियुक्ति होगी और इसके साथ ही दो निगमों का विलय कर एक ही निगम से चुनाव होंगे. इस बार का नगर निगम चुनाव पुराने समीकरणों से अलग होगा, क्योंकि नए परिसीमन के बाद 150 वार्डों के हिसाब से तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.
फिर से एक हो रहा है जयपुर नगर निगम
कांग्रेस सरकार के समय दो हिस्सों में बंटकर काम करने वाला जयपुर नगर निगम अब फिर से एक हो रहा है. राज्य सरकार ने एकीकृत नगर निगम जयपुर की 150 वार्डों के परिसीमन की अधिसूचना जारी कर दी है. यानी शहर की सरकार की नई तस्वीर अब तय है एक नगर निगम और 150 वार्ड. लेकिन असली दिलचस्पी अब "महापौर की लॉटरी" पर टिक गई है. किस वर्ग से मेयर बनेगा, यह लॉटरी ही तय करेगी. दोनों बड़े राजनीतिक दलों के रणनीतिकार मानो सांस रोके बैठे हैं. क्योंकि लॉटरी की एक पर्ची कई नेताओं की ज़मीन खिसका सकती है और किसी नए चेहरे को बड़ा मौका दे सकती है. नवंबर में मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल खत्म होते ही शहर पर प्रशासक की नियुक्ति होना तय मााना जा रहा हैं. उसके बाद निगम चुनाव का बिगुल बजेगा.
बदले हैं राजनीतिक समीकरण
जयपुर नगर निगम में अब 250 की जगह सिर्फ 150 वार्ड होंगे. सियासी गलियारों में चर्चा है कि महापौर की लॉटरी निकलते ही दोनों दल अपने-अपने "पार्षद उम्मीदवारों" की चालें चलना शुरू कर देंगे. फिलहाल, जयपुर की राजनीति में हर कोई यही पूछ रहा है 150 वार्डों वाला नया निगम किसके हाथ आएगा? वर्तमान में जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज में मेयर की सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हैं. नए परिसीमन के मुताबिक सबसे छोटा वार्ड 31 हैं जिसकी जनसंख्या 13 हजार 499 हैं. इसी के साथ 32 हजार 272 की जनसंख्या वाला सबसे बडा वार्ड 135 हैं.
क्या बोले यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा?
उधर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बयानों के मुताबिक प्रदेश में नगरीय निकायों के चुनाव इस साल नहीं होंगे. ये चुनाव अगले वर्ष जनवरी में हो सकते हैं. नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने साफ किया है कि चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग की प्रक्रिया दिसंबर के पहले सप्ताह तक ही पूरी हो पाएगी. इस प्रक्रिया के बाद भी कम से कम एक माह और चाहिए. ऐसे में तकनीकी और प्रशासनिक दृष्टि से दिसंबर में चुनाव संभव नहीं हैं. मंत्री खर्रा ने कहा की सरकार ने अपने स्तर पर सारी तैयारी कर ली है. अब सिर्फ दो काम बचे हैं ओबीसी आयोग शहरी निकायों में आरक्षण के लिए आंकड़े उपलब्ध कराए और राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची तैयार करें. ये काम पूरे होते ही राज्य सरकार 4–5 दिन में आरक्षण की लॉटरी निकाल देगी और आयोग से वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत चुनाव की तारीख तय करने का अनुरोध किया जाएगा.
कौन बनेगा गुलाबी नगरी का सरताज
बहरहाल, जयपुर नगर निगम चुनाव की यह नई बिसात कई नेताओं के लिए नई उम्मीदें तो कई दिग्गजों के लिए चुनौती लेकर आई है. परिसीमन से लेकर महापौर की लॉटरी और चुनाव की तारीख तक हर कदम पर सियासत के नए समीकरण बनेंगे और बिगड़ेंगे. अब देखना यह होगा कि 150 वार्डों वाला नया जयपुर नगर निगम किसके हाथों में जाता है और कौन बनता है गुलाबी नगरी की सरकार का असली सरताज.
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