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Jaipur News: राजस्थान का शिक्षा विभाग अब स्कूली शिक्षा को किताबों और क्लासरूम की दीवारों से बाहर निकालकर बच्चों के चहुंमुखी विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एक नई पहल, स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचवीआर), की शुरुआत की गई है, जिसमें राज्य के सभी स्कूलों की भागीदारी अनिवार्य होगी. इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सिर्फ शिक्षित ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है.
6 मानकों पर होगी स्कूलों की परीक्षा
अब स्कूलों का मूल्यांकन 6 प्रमुख मानकों पर किया जाएगा, जो उनकी वास्तविक स्थिति को दर्शाएंगे. इनमें से कुछ मानक भौतिक सुविधाओं से संबंधित हैं:
जल प्रबंधन: स्कूलों में पानी का सही उपयोग और उसके संरक्षण की स्थिति की जाँच की जाएगी.
स्वच्छता और हाइजीन: शौचालयों की साफ-सफाई और बच्चों के लिए साबुन से हाथ धोने की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.
संचालन और रखरखाव: स्कूल के भवन की देखभाल, उसके आसपास का स्वच्छ वातावरण और बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की गुणवत्ता भी रेटिंग का हिस्सा होगी.
मूल्यों और जीवन कौशल पर जोर
इस रेटिंग का सबसे अहम पहलू यह है कि यह केवल भौतिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है. इसमें बच्चों के व्यवहार और जीवन मूल्यों पर भी ध्यान दिया जाएगा. व्यवहार परिवर्तन और क्षमता निर्माण जैसे मानक यह सुनिश्चित करेंगे कि स्कूल बच्चों में अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर रहे हैं या नहीं. इसके अलावा, जीवन कौशल और सह-पाठयक्रम गतिविधियां भी मूल्यांकन का हिस्सा होंगी, ताकि बच्चों की शिक्षा उनके सर्वांगीण विकास से जुड़ सके. यह पहल शिक्षा विभाग का एक बड़ा और दूरदर्शी कदम है. अब किसी भी स्कूल की सफलता सिर्फ उसके परीक्षा परिणामों से नहीं, बल्कि उसकी स्वच्छता, बच्चों में विकसित किए गए मूल्यों और उन्हें सिखाए गए जीवन जीने की कला से तय होगी. यह एक ऐसा नवाचार है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और जिम्मेदार भविष्य की नींव रखेगा.
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