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Jaipur News: AI ने हायरिंग के कई चरणों को प्रोफेशनल्स और हायर करने वालों, दोनों के लिए आसान बना दिया है. अब CV और जॉब डिस्क्रिप्शन जल्दी तैयार हो जाते हैं, स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग का काम तेज हो गया है, और संबंधित लोगों के बीच बातचीत पहले से ज्यादा प्रोफेशनल और पॉलिश्ड हो गई है. लेकिन अब असली चुनौती यह पहचानने की है कि कौन व्यक्ति सच में काम कर सकता है, जल्दी सीख सकता है और जैसे-जैसे रोल बदलते हैं, वैसे-वैसे खुद को ढाल सकता है.
Zee Media और LinkedIn की नई सीरीज ‘Beyond AI, CVs & JDs’ में LinkedIn Talent & Learning Solutions, India की हेड रुची आनंद और Wipro के Chief Operating Officer संजीव जैन ने बताया कि अगला बड़ा बदलाव सिर्फ तेज हायरिंग नहीं है, बल्कि स्मार्ट टैलेंट स्ट्रैटेजी है. ऐसी स्ट्रैटेजी, जिसमें ऑटोमेशन से समय और क्षमता बढ़े, कनेक्टेड स्किल्स से सही टैलेंट पहचाना जाए और इंटरनल मोबिलिटी सच में काम करे.
एक्सेस और मौके बढ़ाने वाला टूल
संजीव जैन ने कहा, 'AI ने टैलेंट, लर्निंग और अवसरों को सच में डेमोक्रेटाइज कर दिया है.' उन्होंने बताया कि पहले जो एडवांस टूल्स, इनसाइट्स और लर्निंग सिस्टम सिर्फ कुछ लोगों के पास थे, अब वे पूरे ऑर्गनाइजेशन में उपलब्ध हैं. लेकिन ज्यादा एक्सेस का मतलब ज्यादा डेटा और ज्यादा एप्लिकेशन भी है. ऐसे में टैलेंट लीडर्स को मजबूत स्किल सिग्नल्स और सोच-समझकर किए गए असेसमेंट की जरूरत है, ताकि शोर में से असली क्षमता को पहचाना जा सके.
रुची आनंद ने कहा, 'यह बदलाव वर्कप्लेस में नई सोच लेकर आया है. जब AI बार-बार दोहराए जाने वाले कामों का बोझ कम कर देता है, तो टीमें स्ट्रैटेजिक कोलैबोरेशन, प्रॉब्लम सॉल्विंग और हाई-वैल्यू कामों पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं. इसका मतलब टैलेंट लीडर्स के लिए स्किल्स-फर्स्ट हायरिंग और डेवलपमेंट पर फोकस करना है, ताकि टीमें लोगों की क्षमता के आधार पर काम कर सकें, न कि सिर्फ पद या डिग्री के आधार पर.'
ऑटोमेशन से एम्प्लीफिकेशन तक
दोनों लीडर्स ने यह भी बताया कि AI अब केवल समय बचाने का टूल नहीं रहा. लीडर्स इसका इस्तेमाल फैसले जल्दी लेने, ऑपरेशनल मजबूती बढ़ाने और टीमों में क्रिएटिविटी को नए स्तर पर ले जाने के लिए करना चाहते हैं. LinkedIn की रिसर्च के मुताबिक, भारत में 52% से ज्यादा रिक्रूटर्स के लिए रिक्रूटमेंट टेक्नोलॉजी और AI टूल्स को ऑप्टिमाइज करना प्राथमिकता है.
संजीव जैन ने उदाहरण देते हुए बताया, 'Wipro में एक AI-इनेबल्ड असिस्टेंट हर हफ्ते कर्मचारियों के एक लाख से ज्यादा सवालों का जवाब देता है. इससे एफिशिएंसी बढ़ी है और टीमें इनोवेशन और स्ट्रैटेजिक कोलैबोरेशन पर ज्यादा समय दे पा रही हैं. इसका मतलब है कि रिक्रूटर्स अब हायरिंग मैनेजर्स को गाइड करने, जॉब रोल्स को स्पष्ट करने और बिजनेस की जरूरत के हिसाब से टैलेंट पाइपलाइन बनाने में ज्यादा समय दे सकते हैं.'
इंटरनल मोबिलिटी
AI ने ऑर्गनाइजेशन में एक बड़ा बदलाव चुपचाप लाया है इंटरनल मोबिलिटी को ऑप्शन नहीं, बल्कि स्ट्रक्चर्ड स्ट्रैटेजी बनाना. रुची आनंद ने कहा, 'मामला सिर्फ टैलेंट खरीदने का नहीं, टैलेंट बनाने का है.' AI-ड्रिवन रोल मैचिंग, स्किल मैपिंग और पर्सनलाइज्ड लर्निंग पाथवे कंपनियों को यह मौका देते हैं कि वे बाहर से हायर करने से पहले अपने ही कर्मचारियों की क्षमता को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ाएं.
प्रोफेशनल्स के लिए एडैप्टेबिलिटी जरूरी
आज करियर ग्रोथ अब सीधी लाइन जैसी नहीं रही. आगे बढ़ने का रास्ता अब स्किल्स, सीखने की क्षमता और नई जिम्मेदारियों को अपनाने की ताकत से तय होता है. LinkedIn के डेटा के अनुसार, भारत में 78% रिक्रूटर्स अब डिग्री से ज्यादा प्रैक्टिकल और ट्रांसफरेबल स्किल्स को महत्व देते हैं.
संजीव जैन ने कहा, 'क्रिटिकल थिंकिंग और रीजनिंग जैसी स्किल्स, जो सही सवाल पूछने में मदद करती हैं, AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ और भी जरूरी होंगी.' वहीं रुची आनंद ने 'लर्नेबिलिटी' यानी लगातार सीखने की क्षमता को प्रोफेशनल सफलता के लिए अहम बताया. उन्होंने कहा, 'यह समझना कि मुझे सब कुछ नहीं आता और मुझे लगातार सीखते रहना है. ये स्किल्स अक्सर कम आंकी जाती हैं, लेकिन बहुत ताकतवर होती हैं.'
जैसे-जैसे AI हमारे काम करने के तरीके बदल रहा है, वैसे-वैसे टैलेंट स्ट्रैटेजी और जरूरी स्किल्स भी तेजी से बदल रही हैं. जो प्रोफेशनल्स और संगठन इन बदलावों को जल्दी अपनाएंगे और लचीली सोच के साथ आगे बढ़ेंगे, वही AI-पावर्ड इकोनॉमी में आगे रह पाएंगे.
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