Alwar News: 'मुआवजा नहीं, जमीन जबरन ली जा रही है' अलवर-जयपुर फोर लेन सड़क विवाद पर किसानों का आरोप

Rajasthan News: अलवर-जयपुर मार्ग पर ढाई पेढ़ी से बारा बियर तक फोर लेन सड़क निर्माण को लेकर विवाद बढ़ गया है. किसानों का आरोप है कि एजेंसी बिना मुआवजा दिए उनकी जमीन व पेड़ जबरन ले रही है. विरोध के बाद काम रोक दिया गया है, आगे और संघर्ष की आशंका है.

Alwar News: 'मुआवजा नहीं, जमीन जबरन ली जा रही है' अलवर-जयपुर फोर लेन सड़क विवाद पर किसानों का आरोप
Image Credit: alwar farmer protest

Alwar News: राजस्थान के अलवर जयपुर मार्ग पर ढाई पेढ़ी से बारा बियर तक बन रहे फोर लाइन सड़क को लेकर विवाद शुरू हो गया है. संबंधित कार्यकारी एजेंसी द्वारा फोर लाइन बनाने के नाम पर अवैध रूप से पेड़ काटे जा रहे हैं. इनके ना तो लैंडमार्क किए गए हैं. ना पेड़ों पर निशान लगाए गए हैं .और जबरन काश्तकारों की जमीनों को अपने कब्जे में ले रहे हैं. विवाद के चलते अभी तो काम रोक दिया गया है. लेकिन यह विवाद आगे बढ़ाने की उम्मीद है. क्योंकि अभी शुरुआत ढाई पेढ़ी से हुई है. आगे ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं .जहां संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है.

ढाई पेड़ी क्षेत्र का मामला
अलवर शहर के ढाई पेड़ी क्षेत्र में मंगलवार सुबह फोर लाइन सड़क विस्तार कार्य के दौरान पेड़ की कटाई को लेकर हंगामा हो गया. उदयपुर की एक प्राइवेट टीम जेसीबी की मदद से पेड़ काट रही थी. स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और काम रुकवा दिया. स्थानीय निवासी मुकेश यादव ने बताया कि यह काम एनएचआई द्वारा कराया जा रहा है. उनका आरोप है कि उनकी दो बीघा जमीन को जबरन अधिग्रहित किया जा रहा है. जब उनसे पूछा गया तो. उन्होंने कहा कि पेड़ को बचाने के लिए यह जमीन आपकी ली गई है. उनका कहना है कि मुआवजा भी नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि गरीब किसानों की जमीन पर अधिकार जताया जा रहा है. जबकि समाधान नहीं किया जा रहा. विरोध के बाद काम को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है. फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले पर स्पष्ट स्थिति नहीं बताई गई है.

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स्थानीय लोगों ने लगाए आरोप
उन्होंने बताया कि अभी तो यह शुरुआत है. बारा बियर नदी तक और भी मामले सामने आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि मैं गरीब आदमी हूं और मात्र दो बीघा मेरे पास जमीन है. अगर यही बिना सूचना के अधिग्रहित कर लेंगे. तो मैं कहां जाऊंगा. प्रशासन भी मेरी सुनवाई नहीं कर रहा है.एक तरफ नहर है. नहर वाले अपनी जमीन बांटने की कोशिश कर रहा है. और सड़क बनाने वाले अपनी सड़क बताने की बात कह रहे हैं. इन्होंने पहले कोई ना तो पेड़ों के निशान लगाए, न लैंडमार्क किया. जिससे अगर कोई विवाद होता तो अब सुलझ गया होता. उन्होंने आरोप लगाया की सड़क निर्माण करने वाली एजेंसी सीधा जेसीबी लेकर आ जाती है. और पेड़ों को हटाना शुरू कर देती है.

1000 से अधिक बड़े पेड़ों को काटा गया
यहां उल्लेखनीय है कि अलवर शहर के परशुराम चौराहे से ढाई पेढ़ी तक सड़क को चौड़ा किया गया. तब यहां 1000 से अधिक बड़े पेड़ों को काटा गया .उसके बदले इनको पेड़ लगाने थे. लेकिन अभी तक इन्होंने पेड़ भी नहीं लगाए. यही हालत इस रोड पर होने हैं.क्योंकि जब भी पेड़ों को काटकर सड़क चौड़ी की जाती है. तो उसके बदले में संबंधित एजेंसी द्वारा पेड़ लगाए जाते हैं.

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