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Panchayat Budget: पंचायत चुनाव से पहले गांव की सरकार में बजट का संकट देखने को मिल रहा है. केंद्र और राज्य का बजट अटकने गांवों की विकास की रफ्तार थम गई है. गांवों में सफाई और पेयजल कार्य रुके हुए है, जिससे 11 हजार पंचायतों में दिक्कतों का सामना करना पड रहा है. केंद्र से बजट ना आने के पीछे राज्य में पंचायत चुनाव समय पर नहीं होना माना जा रहा है.
FFC-SFC की दो दो किश्ते अटकी
चुनाव से पहले गांव की सरकार में बजट के संकट से जूझ रही है. प्रशासक बने सरपंचों का दावा है कि केंद्र और राज्य सरकार का करीब 5500 करोड का बजट अटका है. जिसमें केंद्र सरकार से FFC( Fifteenth Finance Commission) की 1400-1400 करोड की 2 किश्ते रुकी है. जिससे गांवों में सफाई कार्य और पेयजल का काम बाधित है. वहीं राज्य वित्त यानी SFC की 1300-1300 करोड की 2 किश्ते अटकी है. बजट के संकट से गांव में विकास की रफ्तार कमजोर हो गई है. विभागीय सूत्रों का दावा है कि वित्त आयोग द्धारा फंड रोके जाने के पीछे पंचायतीराज चुनाव नहीं होने को कारण माना जा रहा है. केंद्रीय वित्त आयेाग की गाइड लाइन है कि जो राज्य समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराते उन्हें फंड जारी नहीं होगा. चुने हुए जनप्रतिधि ही ग्राम पंचायत की धुरी है, ऐसे में प्रशासकों को बजट जारी नहीं किया जा रहा है. हालांकि पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर दावा कर चुके है कि राजस्थान की पंचायतों में बीएसआर रेट से साफ सफाई की जा रही है, लेकिन बजट पंचायतों में बजट ही नहीं तो कैसे साफ सफाई हो पाएगी?
राष्ट्रीय सरपंच संघ ने की सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द बजट का संकट दूर किया जा सके. राष्ट्रीय सरपंच संघ अध्यक्ष जयराम पलसानिया का कहना है कि जब से सरपंच प्रशासक लगे है तब से बजट नहीं मिला. वहीं काम न होने पर सरकार ने 100 से अधिक पंचायतों में प्रशासकों पर एक्शन लिया है और 25 को बर्खास्त किया है. जबकि सरपंचों का दावा है कि 200 प्रशासकों पर कार्रवाई की गई.
कब होंगे पंचायत चुनाव?
बजट संकट के बीच अब सवाल ये भी है कि राजस्थान में कब पंचायत चुनाव होंगे? क्योंकि पंचायतों में तो सरपंचों को ही प्रशासकों की जिम्मेदारी दे दी, लेकिन अभी भी पंचायत समितियों, जिला परिषदों, पंचायत समितियों में कार्यकाल खत्म नहीं हुआ है. ऐसे में क्या पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख चुनाव की घोषणा बाद में होगी? 21 जिला परिषदों और 222 पंचायत समितियों के सदस्यों और प्रधान, जिला प्रमुखों का कार्यकाल नवंबर, दिसंबर में खत्म होगा. 6 जिला परिषदों और 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल अगस्त-सितंबर 2026 में खत्म होगा. 4 जिला परिषदों और 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म होगा.
कब तक अटका रहेगा बजट?
राजस्थान में पंचायत चुनाव तब ही होंगे, जब ओबीसी आयोग की रिपोर्ट जाएगी. अब तक सर्वें की कार्रवाई शुरू नहीं हुई. वहीं हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव करवाने के निर्देश दिए. अब सरपंचों के बीच यही कश्मकश की स्थिति बनी हुई है कि क्या पंचायत चुनाव के बाद ही बजट जारी होगा? चर्चा ये भी है कि प्रशासकों को FFC की राशि जारी नहीं होती. जिस कारण पंचायतों में बजट का संकट देखने को मिल रहा है. यानि जब चुनाव होंगे तब ही गांव की सरकार में बजट आएगा?
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