Jaipur News: सरकार को अल्टीमेटम! जयपुर में गूंजे सैनिकों के स्वाभिमान के नारे

Rajasthan News: जयपुर में सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने अपनी मांगों को लेकर स्वाभिमान रैली निकाली. सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि मांगे पूरी नहीं हुईं तो प्रदेशभर में चक्का जाम किया जाएगा. रैली में हजारों सैनिक, पूर्व सैनिक और परिजन शामिल हुए.

Jaipur News: सरकार को अल्टीमेटम! जयपुर में गूंजे सैनिकों के स्वाभिमान के नारे
Image Credit: jaipur soldiersSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Jaipur News: प्रदेश में सैनिक और पूर्व सैनिक अपनी मांगों को पूरी करवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ये सैनिक स्वाभिमान रैली करने जयपुर कमिश्नरेट के पास शहीद स्मारक पर पहुंचे. प्रदेशभर से पहुंचे सेवारत सैनिकों, रिटायर्ड फौजियों, वीरांगनाएं वीर माता पिता अपने मान सम्मान और स्वाभिमान के लिए इकट्ठे हुए. सैनिकों ने आक्रोश व्यक्त किया कि वो अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों से लेकर राजनीतिज्ञों तक से मिल चुके हैं. सैनिक समाज और देश की रक्षा करता है,लेकिन उनकी जायज मांगों को भी अनसुना किया जा रहा है. रैली में कई वक्ताओं ने चेतावनी दी कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो हर तहसील स्तर पर चक्का जाम किया जाएगा.

प्रमुख मांगे जिनको लेकर आंदोलन किया जा रहा है
1. सैनिकों की पुनर्वास योजना 1988 में संशोधन कर अलग से मैरिट बनाना चाहते हैं. अभी क्लास 'A' में 5%, 'B&C' में 12.5% और 'D' में 15% हैं. लेकिन ये केवल आंकड़ों में ही है, धरातल पर बहुत कम मिल रहा है.
2. BSTC के समकक्ष UEI/NCO Code को मान्यता प्रदान की जाए. 2019 से पहले BSTC के समकक्ष मान्यता वाले सभी फौजी नौकरी कर रहे हैं, कांग्रेस तत्कालीन सरकार कोर्ट में गई, सैनिक हाईकोर्ट में जीत गए तो सुप्रीम कोर्ट चली गई सरकार, मामला पेंडिंग है.
3. वन रक्षक भर्ती में शारीरिक दक्षता में छूट की मांग. DOP के अप्रैल 2018 परिपत्र के अनुसार सभी विभागों में छूट प्रदान करनी चाहिए लेकिन (पुलिस) गृह विभाग तो छुट देता है और वन विभाग नहीं दे रहा है.
4. हर वर्ग की तरह सरकारी नौकरियों में पूर्व सैनिकों को दोहरा लाभ दें . सिविल का बच्चा अपने higher रैंक में जाने के लिए हर बार अपने वर्ग का फायदा उठाता है. लेकिन सैनिक एक बार अपने कोटे से लग गया तो वह दुबारा सैनिक कोटा नहीं ले सकता.
5. न्यूनतम अंकों की बाध्यता ख़त्म किया जाए. एक 20 से 22 साल तक के युवा के बराबर सैनिक कभी भी नंबर नहीं ला सकता, फिर भी कंपटीशन में सैनिक को बराबर नंबर लाने को बाध्य किया जा रहा है जो कि गलत है.
6. राज्य सरकार में पूर्व सैनिकों की पेंशन की आयु सीमा 25 वर्ष की बाध्यता को समाप्त करने की मांग. सैनिक कभी भी सेवानिवृत्त होकर 25 साल तक सेवा नहीं दे सकता जिसकी वजह से राज्य सरकार में दूसरी नौकरी से सेवानिवृत्ति के समय जो पेंशन मिलती है. वो last pay की 30% ही मिलती है जबकि मिलनी चाहिए 50%.
7. राजनीतिक पदों में 5% पद आरक्षित किए जाए. जैसे कि - पंचायत राज (सरपंच, पार्षद, जिला अध्यक्ष, प्रधान)
8. आए दिन सैनिकों एवं परिवारजनों के साथ हो रही अमानवीय घटनाओं के लिए अलग से सैनिकों के विशेष कानून बनाना चाहिए . जैसे डॉक्टर और वकीलों के लिए है.

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सरकार नहीं देती है सर्टिफिकेट
इधर स्वाभिमान रैली में बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि सैनिकों के साथ दोयम दर्ज का व्यवहार किया जाता है. रक्षा के दौरान 80 प्रतिशत तक डिसेबिलिटी लेकर आते हैं, लेकिन प्रदेश में सरकार सर्टिफिकेट नहीं देती है. रोडवेज बसों में धक्के खाते हैं सैनिक. सैनिकों को बस में सीट नहीं मिलती. सरकार को इसके लिए कोई अलग से बजट खर्च नहीं करना पड़ेगा. सरकारों के ध्यान नहीं देने के पीछे एक ही कारण है कि हम सोये हुए हैं, हम सबको जागना पड़ेगा, हम अनुशासन में रहे हैं, लेकिन अनुशासन को तोड़ना होगा, सारी हदें पार करनी होगी. अब बस सड़कों पर उतरना पड़ेगा.

क्या बोले पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल कमल सिंह रेप्सवाल?
पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल कमल सिंह रेप्सवाल ने कहा कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों की कुछ समस्याएं हैं. इनको लेकर मंत्रियों और अफसरों से मिले, लेकिन सकारात्मक जवाब नहीं मिल पा रहा है. फौजियों की समस्याओं पर अलग से ध्यान देकर समाधान करने की जरूरत है. वहीं पूर्व सैनिक संघ के पूर्व अध्यक्ष जनरल सत्यपाल कटेवा ने कहा कि अपने स्वाभिमान को लेकर रैली निकालनी पड़ी है, सरकार से कोई लड़ाई झगड़ा नहीं चाहते हैं. सरकार को इनकी समस्याओं के बारे में सुध लेनी चाहिए. सरकारें शहीद का दर्जा नहीं मिलने वाले सैनिक परिवारों के साथ बच्चे और पत्नी को नौकरी नहीं देकर दोहरा व्यवहार कर रही है.

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