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Rajasthan New Land Registry Rule: सोसायटी पट्टों की रजिस्ट्री अब पहले की तरह जारी रहेगी. दो दिनों तक चली उलझन और भ्रम के बाद डीआईजी स्टांप प्रथम देवेंद्र कुमार जैन ने स्पष्ट कहा कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में कोई प्रतिबंध नहीं है और सोसायटी के पट्टे भी पूर्ववत रजिस्टर्ड होंगे. इससे आमजन और प्रॉपर्टी संबंधी काम रुके लोगों को राहत मिली है.
गफलत और गलत व्याख्या से रुकी रजिस्ट्री
नए संशोधन संबंधी नोटिफिकेशन आने के बाद इसका अर्थ सही तरह समझ नहीं आ पाया. जयपुर में कई उप-पंजीयक कार्यालयों में दस्तावेज लेना तक बंद कर दिया गया. अफसर स्तर पर निर्देशों की स्थिति अस्पष्ट रही और अधिवक्ताओं ने विरोध में स्ट्राइक कर दी. नतीजा, दो दिन तक पूरी प्रक्रिया ठप हो गई.
विभाग समझता रह गया, पब्लिक फाइलें पकड़कर खड़ी रही
अधिवक्ताओं ने नोटिफिकेशन को सोसायटी के पट्टों को रोकने जैसा माना. उधर, सब-रजिस्ट्रार ने दस्तावेज लेना बंद कर दिया. वहीं विभाग लगातार इसकी व्याख्या में उलझा रहा. सवाल यह उठा कि जब संशोधन स्पष्ट प्रारूप में था, तो विभाग की लीगल टीम इसे समय पर क्यों नहीं समझ पाई.
गैर-जरूरी भ्रम का असर
भ्रम के कारण रजिस्ट्री के कामकाज पर ब्रेक लग गया. पब्लिक लाइन में फाइल लेकर खड़ी रही, वहीं राजस्व को करोड़ों का अनुमानित नुकसान भी हुआ.
दो दिन बाद क्या पता चला
देर से हुए स्पष्टिकरण में सामने आया कि जैसे रजिस्ट्री पहले होती थी, वैसे ही बिना बाधा जारी रहेगी. न तो सोसायटी पट्टों पर रोक लगी थी और न ही सामान्य दस्तावेजों पर. अब सवाल यह है कि जब रोक थी ही नहीं, तो रोक किसने लगाई और कौन जिम्मेदार है.
राहत, लेकिन सवाल बरकरार
पब्लिक अब राहत महसूस कर रही है, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नोटिफिकेशन की गलत या अधूरी व्याख्या, कार्यालयों में भ्रम फैलाना और बिना अधिकार दस्तावेज़ लेना बंद करना गंभीर प्रशासनिक खामी है. अब कार्य पहले की तरह हो रहे हैं, लेकिन दो दिन का व्यवधान दिखाता है कि सिस्टम की नासमझी और राजस्व नुकसान पर जवाबदेही अभी बाकी है.
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