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Jaipur News: समाज की मूल धारा से कट कर जी रहे ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों से आम व्यक्ति मिलते ही असहज हो जाता है. चुनाव के समय तो इन्हें ढूंढकर मत डलवाया जाता है, लेकिन बाद में इन्हें देखते ही क्या राजनेता और क्या आमजन, हर कोई कन्नी काट लेता है. यदि इस समुदाय को मूल धारा में लाना है तो सरकार को हर विभाग में कम से कम एक ट्रांसजेंडर को नियुक्ति देनी चाहिए. यह कहना है प्रदेश की पहली ट्रांसजेंडर वकील होने का दावा करने वाली रवीना सिंह उर्फ रविन्द्र सिंह का.
राजपूत परिवार में जन्मी रविना
राजपूत समाज में जन्मी रवीना जन्म से ही ट्रांसजेंडर हैं. परिजनों ने शुरुआत में इनका पालन-पोषण लडके जैसे किया, लेकिन जब रवीना के ट्रांसजेंडर होने की बात खुली तो परिजनों ने इनसे किनारा ही कर लिया. दो भाईयों के साथ रहने वाली रवीना ने भी परिवार की मनोदशा को देखते हुए अलग ही रहने का फैसला ले लिया. कुछ समय के लिए इसी वर्ग के अन्य लोगों के साथ रहकर रवीना ने बधाईयां भी मांगी, लेकिन बाद में उन्हें यह रास नहीं आया.
कड़वे व्यवहार का किया सामना
स्कूली और कॉलेज शिक्षा में जिस तरह हर ट्रांसजेंडर को सहपाठियों के कड़वे व्यवहार का सामना करना पडता है, वैसा रवीना के भी साथ हुआ. मॉडलिंग और मेकअप आर्टिस्ट बनने की इच्छा रखने वाली रवीना ने समाज की बेरुखी के चलते इस समुदाय को उनके अधिकार दिलाने के लिए कमर कसी और वकील बनने की ठानी. कोचिंग संस्थानों ने भी ट्रांसजेंडर होने के कारण इन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया और फिर वह अपने बल पर कानून की पढाई की और प्रथम श्रेणी से एलएलबी पूरी की.
तकनीकी कारणों से महिला वर्ग में हैं पंजिकृत
हालांकि तकनीकी कारणों के चलते बार कौंसिल ने उसे महिला वर्ग में पंजीकृत किया है. हर लडकी की तरह शादी का सपना संजोने वाली रवीना का कहना है कि जब उसे कोई इस रूप में स्वीकार करेगा तो वह भी शादी करेगी. बीते माह वकील के तौर पर पंजीकृत होकर फिलहाल रवीना राजस्थान हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रही है और ट्रांसजेंडर समुदाय को उनके अधिकार दिलाने के लिए अग्रसर है.
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