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Dausa News: राजस्थान में आज भी राजा महाराजाओं की परंपरा पूरे जोश और उल्लास से निभाया जाता है. ऐसा ही शानदार और मनमोहक दृश्य दौसा जिले में देखने को मिला. जहां पुरानी परंपरा के अनुरूप रामगढ़ पचवारा में झूला महोत्सव का आयोजन किया गया बताया जा रहा है. यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है और इस महोत्सव में दौसा जिले के नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों से लोग पहुंचते हैं और महोत्सव में शामिल होते हैं. झूला महोत्सव के इस आयोजन में हजारों की तादाद में लोगों की भीड़ पहुंची तो पुलिस को भी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.
झूला महोत्सव में निकली झांकियां
झूला महोत्सव के चलते मंदिरों में भव्य मनमोहक झांकियां सजाई गईं. जिसके लोगों ने बारी बारी से दर्शन किए पूर्व में स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा लोक संस्कृति गीतों की प्रस्तुतियां दी जाती थी तो वही रामलीला का मंचन होता था. लेकिन बदलते समय में यह लुप्त हो गया और झूला महोत्सव पर पाश्चात्य संस्कृति हावी हो गई. जिसके चलते फिल्मी गीतों पर कलाकार नृत्य करते हुए दिखाई दिए. हालांकि मीणा ढांचा का भी आयोजन किया गया. जिसका लोगों ने खूब आनंद लिया.
श्रावण माह की पूर्णिमा
प्राचीन समय में झूला महोत्सव की परंपरा के पीछे क्या मनसा रही होगी यह तो साफ नहीं है लेकिन बड़े बुजुर्गों की माने तो श्रावण माह की पूर्णिमा को यह महोत्सव हर बार आयोजित किया जाता है. निरंतर 24 घंटे तक चलता है इसके पीछे लॉजिक यही है कि पहले के समय में मनोरंजन के कोई संसाधन नहीं होते थे. तो इस तरह के आयोजन किए जाते थे. साथ ही इन आयोजनों के बहाने लोग एक दूसरे से प्यार प्रेम से मिलते थे और सामाजिक उत्थान को लेकर चर्चा भी करते थे.
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