Kanwad Yatra: गलता तीर्थ से उठी शिवभक्ति की सुनामी – जयपुर बना छोटी काशी!

Rajasthan News: जयपुर ने सावन के अंतिम रविवार को शिवभक्ति, राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम देखा. गलता तीर्थ से हजारों कांवड़िए "हर हर महादेव" के जयघोष के साथ निकले. महिलाओं की भागीदारी और नेपाल-भारत की सांझी आस्था ने इसे ऐतिहासिक बना दिया.

Kanwad Yatra: गलता तीर्थ से उठी शिवभक्ति की सुनामी – जयपुर बना छोटी काशी!
Image Credit: jaipur kawad yatra

Jaipur News: जयपुर में सावन के अंतिम सोमवार से एक दिन पहले रविवार को अद्भुत आस्था, भक्ति और राष्ट्रप्रेम का संगम देखने को मिला. गलता तीर्थ से लेकर शहर के प्रमुख शिवालयों तक "हर-हर महादेव" के जयघोष के साथ सैकड़ों कांवड़ यात्राएं निकली. गलता तीर्थ से उठती हर-हर महादेव की गूंज, डीजे पर भक्ति गीतों पर झूमते भक्त, तिरंगे के साथ नारीशक्ति का ओज और नेपाल-भारत की सांझी संस्कृति का संगम देखते हुए ऐसा लग रहा था कि जयपुर जैसे चलती-फिरती शिव बारात बन गया हो. जहां हर मोड़ पर आस्था मुस्कुरा रही थी और हर गली से गूंज रहा था बोल बम...हर हर महादेव.

एकता का अद्भुत संगम
श्रावण मास के अंतिम सोमवार से एक दिन पूर्व रविवार को जयपुर ने सिर्फ कांवड़ यात्रा नहीं देखी, बल्कि शिवत्व का पर्व, राष्ट्रप्रेम का संदेश, नारीशक्ति की भक्ति और भारत-नेपाल की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम भी देखा. सावन की इस बेला में जयपुर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जहां शिव हैं, वहां शक्ति है, श्रद्धा है और वहीं देश की आत्मा बसती है.

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हर गली में दिखा उत्सव
गलता तीर्थ से लेकर शहर के प्रमुख मार्गों तक हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे. डीजे पर भक्ति गीतों की धुनों पर झूमते भक्तों के साथ हाथों में तिरंगा और कंधों पर आस्था की कांवड़ ने जयपुर को शिव की जीवंत बारात में तब्दील कर दिया. शहर की हर गली और मोड़ पर बोल बम की गूंज और श्रद्धा का उत्सव देखा गया.

फूलों से हुआ स्वागत
शहर भर में जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया. चौराहों पर सजी झांकियों में नंदी से लेकर शिव परिवार की झलक देखने को मिली. डमरू की ध्वनि के साथ जब वातावरण शिवमय हुआ तो हर भक्त भावविभोर नजर आया. भक्ति का यह मेला थमता नहीं दिखा, क्योंकि जब रगों में श्रद्धा बह रही हो, तो शरीर विश्राम नहीं मांगता.

1100 महिलाओं ने लिया भाग
इस आयोजन में प्रवासी नेपालियों की भागीदारी ने भारत-नेपाल की सांस्कृतिक मैत्री को और मजबूत किया. गलताजी से 22वीं कांवड़ यात्रा बाबा डबल शंकर महादेव मंदिर तक निकाली गई, जिसमें 1100 महिलाओं ने सिर पर कलश लेकर भाग लिया. नारीशक्ति की यह भक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से प्रेरित थी और यह संदेश दे रही थी कि जहां नारी है, वहीं सच्ची भक्ति है.

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