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Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां करीब दो साल पहले श्रद्धा और पर्यटन को जोड़ने के नाम पर खोले के हनुमानजी मंदिर में मां अन्नपूर्णा मंदिर से वैष्णो देवी मंदिर तक रोप-वे शुरू हुआ. लेकिन धीरे-धीरे ये रोपवे अब रेस्त्रां की आड़ में नियमों की रस्सियों को तोड़ने का रास्ता बन गया. श्रद्धा की ऊंचाईयों तक पहुंचाने वाला रोपवे अब सवालों की गहराइयों में फंसा है. खोले के हनुमान मंदिर रोपवे में वन अधिनियम की ऐसी धज्जियां उड़ीं कि अब एनजीटी को दखल देना पड़ा है.
जयपुर के खोले के हनुमानजी मंदिर का मामला
जयपुर के खोले के हनुमानजी मंदिर में बने रोपवे से आप ऊपर तो चढ़ सकते हैं. लेकिन नियम-कानून इस रोपवे की कुर्सी पर ही लटके रह गए. रोप-वे रेस्त्रां की आड़ में जंगल की ज़मीन पर खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ती रहीं और जिम्मेदार अफसर बस फाइलों को ताकते रहे. 30 जून को निरीक्षण के बाद 7 जुलाई को वन विभाग के एसीएफ देवेन्द्र सिंह राठौड ने 15 बिंदुओं की निरीक्षण रिपोर्ट डीसीएफ विजयपाल सिंह को पूरी रिपोर्ट भेज दी कि रोपवे की आड में रेस्टोरेंट, जिपलाइन, प्लास्टिक पैक सामान की बिक्री, फिश स्पा है, बॉडी मसाज है, और यहां तक कि तंबाकू तक खुलेआम बिक रहा है. जो वन अधिनियम, वन्यजीव अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण कानून का खुला उल्लंघन हैं. लेकिन इस पूरी फाइल को टेबल पर रखे-रखे दस दिन बीत गए लेकिन फिर भी कार्रवाई रुकी रही, और नियम ताक पर रखे जाते रहे.
एनजीटी ने लिया मामले का संज्ञान
दरअसल खोले के हनुमानजी में मां अन्नपूर्णा मंदिर से लेकर वैष्णो देवी मंदिर तक चलने वाला यह रोक इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित रोपवे अब विवादों के जाल में उलझ चुका है. धीरे-धीरे बढ़ते पर्यटकों की संख्या के साथ यहां रेस्त्रां की आड़ में अवैध वन भूमि पर गैर-वानिकी गतिविधियां शुरू हो गईं. अब एनजीटी ने मामले पर संज्ञान लिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है जब वन विभाग के डीसीएफ को 7 जुलाई को जानकारी मिल गई थी, तो कार्रवाई की फाइल डीसीएफ विजयपाल की टेबल पर 10 दिन तक क्यों अटकी रही? सवाल सिर्फ फर्म पर नहीं, सिस्टम पर भी है. क्या डीसीएफ जानबूझकर फाइल को रोकते रहे? क्या किसी तरह का दबाव काम कर रहा था? क्यों अब तक रोप-वे का संचालन कर रहीं रोक इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड फर्म के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई? अगर नियम तोड़े गए तो अफसर कैसे बच सकते हैं?
बिना एनजीटी के नहीं होती है क्या कार्रवाई?
वन विभाग के डीसीएफ से जब जी मीडिया ने फाइल को दस दिन रोकने का कारण पूछा तो कहा गया की प्रक्रिया में समय लगता है. लेकिन यही सवाल फिर उठता है क्या जब तक एनजीटी डंडा नहीं चलाता, तब तक सिस्टम नहीं चलता? अब एनजीटी का नोटिस के बाद अफसर और फर्म दोनों कटघरे में हैं. एनजीटी ने इस पूरे प्रकरण में जयपुर कलेक्टर, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड मेंबर सेक्रेटरी, और PCCF को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जयपुर का ये मामला सिर्फ एक रोपवे का नहीं, उस सिस्टम का आइना है, जो नियमों की रस्सी पर लटक रहा है. जिस जमीन को संरक्षित कहा गया, वहां रेस्त्रां, मसाज, स्पा और तंबाकू तक बेचा गया और जब एक्शन का वक्त आया तो फाइलें टेबल पर आराम करने लगीं. 17 जुलाई को अनियमितताओं पर कार्रवाई हुई लेकिन आज तक फर्म पर कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया. ना लाइसेंस रद्द, ना ब्लैकलिस्टिंग सिर्फ प्रक्रिया का नाम लेकर टालमटोल की गई. अब जांच की आंच फर्म से निकलकर अफसरों तक पहुंच चुकी है. डीसीएफ ने क्यों 10 दिन तक फाइल को रोके रखा इस पर अब विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक रही है.
जानिए रोपवे फर्म का कैसे चला अनियमित्तताओं का खुला खेल
1.रोपवे के अपर स्टेशन पर स्थाई निर्माण कर अवैध रेस्टोरेंट का संचालन किया.
2.गर्म पेय पदार्थ,खाद्य पदार्थ नियम विरूद्ध प्लास्टिक के कपों में बेची जा रही थी.
3.रोपवे के लिए 0.8735 हेक्टेयर वन भूमि को डायवर्टेड किया,लेकिन इससे ज्यादा वन क्षेत्र उपयोग में लिया.
4.360 डिग्री पर साइकिल चलाने जैसा खुला खेल खेला जा रहा था.
5. प्लास्टिक पैक सामान,पानी की बोतले महंगी दरों पर बेची हा रही थी.
6.अपर स्टेशन पर व्यावसायिक दुकाने बनाने के लिए भवन निर्माण सामग्री मिली.
7.प्लास्टिक कचरा जंगल में उडता,गिरता पाया गया.
क्या फिर से सिस्टम की लाचारी नोटिस में दफन हो जाएगी?
देखना अब ये है रोपवे से रस्सी काटी जाएगी या सिस्टम की लाचारी एक और नोटिस में दफन हो जाएगी? इससे यह साफ हो गया है कि अब सिर्फ फर्म नहीं, बल्कि फाइल को रोकने वाले अफसर भी सवालों के घेरे में हैं. ये सिर्फ रोपवे की बात नहीं. ये उस सिस्टम की तस्वीर है, जहां नियम रस्सियों पर लटकते हैं, और कार्रवाई फाइलों में फंस जाती है. अब देखना ये है क्या सिर्फ नोटिस के जवाब आएंगे या जवाबदेही भी तय होगी?
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