राजस्‍थान के किसानों की बल्‍ले-बल्‍ले! जमीन मुआवजे के साथ सरकार देगी खास तोहफा

Jaipur News: राजस्थान सरकार की भूमि नीति 2015 और 2025 में बड़ा बदलाव हुआ है. 2015 में भूमि आवंटन मुख्यतः स्कूल, अस्पताल और धार्मिक संस्थाओं के लिए था, जबकि 2025 की नीति में उद्योग, किसानों व निवेशकों को प्रोत्साहन देने पर फोकस किया गया है.

राजस्‍थान के किसानों की बल्‍ले-बल्‍ले! जमीन मुआवजे के साथ सरकार देगी खास तोहफा
Image Credit: land policy rajasthan 2025

Rajasthan News: जयपुर में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने प्रेस ब्रीफिंग में भूमि आवंटन नीति को लेकर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में सार्वजनिक, सामाजिक और धार्मिक उद्देश्यों के साथ-साथ विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, पर्यटन एवं व्यापारिक गतिविधियों के लिए भूमि आवंटन की स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाएगी.

भूमि आवंटन नीति 2025 को मंजूरी
इसके लिए भूमि आवंटन नीति 2025 को मंजूरी दी गई है, जो 2015 की पुरानी नीति में संशोधन करके तैयार की गई है. नई नीति के तहत मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों, समाचार पत्र संस्थानों और कंपनियों को भी भूमि आवंटन का प्रावधान होगा. विशेष रूप से, अब डीएलसी दर की केवल 25% दर पर भूमि आवंटित की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी. मंत्री पटेल ने कहा कि इस कदम से शिक्षा, व्यापार और सामाजिक क्षेत्रों को गति मिलेगी और नगरीय विकास को नई दिशा प्रदान होगी.

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2015 बनाम 2025, जानें क्या बदला
राजस्थान में जमीन के आवंटन को लेकर सरकार ने समय-समय पर नीतियों में बदलाव किए हैं. 2015 में बनाई गई भूमि नीति का मकसद जहां पारदर्शिता और सामाजिक संस्थाओं को प्राथमिकता देना था, वहीं 2025 की नई नीति निवेशकों और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है.

2015 की नीति
2015 की भूमि आवंटन नीति के तहत स्कूल, अस्पताल, सामाजिक संस्थाएं और राजनीतिक दल मुख्य लाभार्थी थे. इस नीति में आवेदन के बाद सार्वजनिक आपत्तियां ली जाती थीं ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष रहे. कीमत भी तय थी, विकसित भूमि के लिए आरक्षित दर से 15% अधिक और अविकसित भूमि के लिए DLC दर से 20% अधिक. हालांकि, इस व्यवस्था में उद्योगों और बड़े निवेशकों को बहुत प्रोत्साहन नहीं मिल पाया.

2025 की नीति
नई भूमि नीति 2025 में सरकार ने निवेशकों और औद्योगिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है. अब शहरी क्षेत्रों में सरकारी विभागों को 13,000 वर्ग मीटर तक की भूमि नि:शुल्क दी जा सकती है. साथ ही, उद्योगों के लिए प्रत्यक्ष आवंटन की सुविधा शुरू की गई है, जिससे लंबी प्रक्रिया से बचा जा सके.

अहम बदलाव
सबसे अहम बदलाव यह है कि निजी भूमि लेने पर मालिकों को केवल नकद मुआवज़ा ही नहीं बल्कि 25% विकसित भूमि वापस दी जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम किसानों और ज़मीन मालिकों के लिए बड़ा लाभकारी साबित होगा.

विशेषज्ञों के अनुसार
विशेषज्ञों का कहना है कि 2015 की नीति जहां सामाजिक क्षेत्र में काम आने वाली संस्थाओं को सहारा देने वाली थी, वहीं 2025 की नीति राज्य को औद्योगिक रूप से और मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर है. सरकार का दावा है कि नई नीति से निवेश और रोजगार के अवसरों में बड़ी बढ़ोतरी होगी.

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