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Hanumangarh Farmer Protest: हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर भड़की आग अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रही. इसके राजनीतिक मायने भी तेजी से सामने आ रहे हैं. हिंसा के बाद अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है. आज सरकार की तरफ़ से दो वरिष्ठ मंत्रियों ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर ना सिर्फ घटना का ब्योरा दिया, बल्कि सीधे तौर पर कांग्रेस और माकपा पर माहौल बिगाड़ने का आरोप भी लगाया.
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हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर भड़की हिंसा के बाद पूरे मामले पर राजनीति तेज हो गई है. प्रदेश सरकार की ओर से मंत्री सुमित गोदारा और विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर न केवल घटना की जानकारी दी. बल्कि इसके पीछे कांग्रेस और माकपा नेताओं की भूमिका पर गंभीर आरोप भी लगाए. मंत्री सुमित गोदारा ने खुलासा किया कि एथेनॉल फैक्ट्री लगाने का फैसला कांग्रेस सरकार के दौरान ही हुआ था. ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड के साथ 2022 में एमओयू किया गया और 2023 में भूमि का औद्योगिक उपयोग के लिए संपरिवर्तन भी कांग्रेस शासन में ही कराया गया. उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि जिस परियोजना को कांग्रेस ने स्वयं आगे बढ़ाया, आज उसी पर राजनीति कर लोगों को उकसाया जा रहा है. कांग्रेस हमेशा किसान कल्याण के नाम पर झूठ फैलाती रही है जबकि असल में अपने शासन में किसानों का शोषण किया. उन्होंने कहा कि एथेनॉल फैक्ट्री लगने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसानों को लाभ मिलेगा. लोगों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि फैक्ट्री पानी का दोहन करेगी, जबकि इसका एमओयू कांग्रेस सरकार के समय ही हुआ था. गोदारा ने कहा जो भीड़ हिंसा में शामिल हुई, वह किसान नहीं थी बल्कि कांग्रेस और माकपा नेताओं के समर्थक थे. उन्होंने बताया कि पुलिस और प्रशासन ने पूरी संवेदनशीलता के साथ स्थिति संभालने की कोशिश की, यहां तक कि फैक्ट्री प्रबंधन ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए काम रोकने की घोषणा भी कर दी थी. इसके बावजूद, विरोध की आड़ में भीड़ को भड़काया गया और हिंसा फैलाने की कोशिश की गई. प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि असामाजिक तत्व, जिनमें कई बाहरी लोग शामिल थे, हिंसा के दौरान सक्रिय रहे. पुलिस की समझाइश के बावजूद इन लोगों ने पत्थरबाजी की और ट्रैक्टरों से पुलिसकर्मियों को कुचलने का प्रयास किया. इस हमले में पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और 10 से अधिक वाहनों को आग लगा दी गई. राज्य सरकार ने दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है और एफआईआर दर्ज की जा चुकी है.
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संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि कांग्रेस की दोहरी नीति इस पूरे प्रकरण में साफ झलकती है. उन्होंने कहा कि जिस परियोजना को कांग्रेस ने खुद मंजूरी दी, आज उसके ही नेता किसानों को भड़का रहे हैं. किसान हित पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसानों से संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. किसान मुद्दे पर राजनीति को लेकर मंत्री ने कांग्रेस पर तीखे शब्दों में हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासन में किसानों का शोषण हुआ, फसल खराबे का मुआवजा नहीं मिलता था और बदहाल किसान आत्महत्या तक को मजबूर होते थे. वहीं वर्तमान सरकार द्वारा किसानों की आर्थिक मजबूती के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि किसान सम्मान निधि में किसानों को 9,000 रुपये प्रतिवर्ष दिए जा रहे हैं, जिसे आगे 12,000 रुपये तक बढ़ाया जाएगा. इसके अलावा गन्ने के समर्थन मूल्य में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी भी की गई है.
बहरहाल, टिब्बी में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर उठा विवाद अब सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना का मुद्दा नहीं रहा यह सीधे तौर पर राजनीति, किसानों और कानून-व्यवस्था के बीच खिंची लकीरों को सामने लेकर आ गया है. सरकार जहां इसे कांग्रेस और माकपा की उकसाहट का नतीजा बता रही है, वहीं दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई की बात हो रही हैं. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बातचीत की बात कितनी आगे बढ़ती है और क्या टिब्बी में फिर से माहौल सामान्य हो पाता है या नहीं.
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टिब्बी में हुई हिंसक घटनाओं पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की प्रतिक्रिया
हनुमानगढ़ के टिब्बी इलाके में प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर किसानों का विरोध और हालिया हिंसक घटनाओं पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इस फैक्ट्री की जमीन का आवंटन पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था और गहलोत सरकार में MOU साइन होने के बाद ही इस परियोजना को मंजूरी मिली. यह देश का सबसे बड़ा इथेनॉल प्रोजेक्ट बनने जा रहा है, लेकिन जिस दल की सरकार में इसका MOU हुआ, उसी दल के कुछ विधायक अब किसानों के साथ प्लांट पर धावा बोल रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि किसानों की समस्याएं जायज हो सकती हैं, लेकिन हिंसा किसी भी तरह समाधान नहीं है. लोकतंत्र में अपनी बात रखने के लिए बेहतर तरीके मौजूद हैं, धावा बोलने से केवल हालात बिगड़ते हैं.
डॉ. मीणा ने कलेक्टर के जरिए किसानों तक संदेश भेजते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं निवेश को प्रभावित करती हैं और अगर माहौल खराब होगा तो बाहरी निवेशक राजस्थान में क्यों आएंगे? उन्होंने दावा किया कि सरकार ने प्रदेश में उद्योगों के लिए अच्छा माहौल बनाया है, इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया है और नए निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं. किसानों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी बात सरकार तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचाएं, तभी मुद्दों का स्थायी समाधान निकल सकेगा.
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