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Conversion Act 2025: राजस्थान में धर्मांतरण और लव जिहाद को रोकने के लिए नया कानून बनने जा रहा है. नए कानून में धर्मांतरण पर 7 साल से आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया है. भजनलाल कैबीनेट ने तय किया है कि सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में राजस्थान विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 लेकर आएगी.
विधेयक में हालांकि कानूनी रूप से धर्म परिवर्तन का हवाला दिया गया है, लेकिन उसके लिए भी कठोर प्रावधान किए गए हैं. मूल धर्म में घर वापसी को धर्मांतरण नहीं माना गया है. प्रदेश में धर्मांतरण और लव जिहाद के मामले बढ़े तो सरकार की चिंता भी बढ़ी. विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय कार्य अध्यक्ष आलोक कुमार अपनी टीम के साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मिले.
उन्होंने धर्म परिवर्तन रोकने के लिए कठोर कानून बनाने की मांग की. इसके बाद भजनलाल कैबीनेट ने नए कानून के नए प्रारूप प्रस्ताव को मंजूरी दी. अब प्रलोभन अथवा कपटपूर्वक धर्मान्तरण के प्रयासों को रोकने के लिए राजस्थान विधिविरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 विधानसभा में लाया जाएगा.
अभी राज्य में अवैध रूप से धर्मान्तरण को रोकने के सम्बन्ध में कोई विशिष्ट कानून नहीं है. इसलिए राजस्थान विधिविरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 को पिछले सत्र में विधानसभा में लाया गया था. अब इस विधेयक को वापस लेकर इसमें और कठोर प्रावधान करते हुए राजस्थान विधिविरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 का नया प्रारूप विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा.
इस विधेयक के कानून बनने के उपरान्त कोई व्यक्ति या संस्था, किसी व्यक्ति पर मिथ्या निरूपण, कपटपूर्वक, बलपूर्वक, अनुचित प्रभाव आदि का प्रयोग कर धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकेंगे. अगर कोई व्यक्ति अथवा संस्था ऐसा कृत्य करते हैं, तो उन्हें कठोर दण्ड दिया जाएगा.
अगर कोई व्यक्ति केवल विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से विवाह करता है, तो ऐसा विवाह शून्य होगा. इस विधि में अपराध गैर-जमानती व संज्ञेय होंगे. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में मूल पैतृक धर्म में वापसी को धर्म परिवर्तन की परिभाषा में सम्मिलित नहीं किया गया है.
अवैध धर्मान्तरण पर न्यूनतम 7 वर्ष एवं अधिकतम 14 वर्ष के कारावास एवं न्यूनतम 5 लाख रुपए का जुर्माना. नाबालिग, दिव्यांग, महिला, एससी, एसटी वर्ग के धर्म परिवर्तन पर न्यूनतम 10 वर्ष एवं अधिकतम 20 वर्ष के कारावास एवं न्यूनतम 10 लाख रूपये का जुर्माना. सामूहिक धर्म परिवर्तन पर न्यूनतम 20 वर्ष एवं अधिकतम आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 25 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है.
धर्म परिवर्तन के लिए विदेशी संस्थान एवं अवैध संस्थान से धन प्राप्त करने पर न्यूनतम 10 वर्ष एवं अधिकतम 20 वर्ष के कारावास एवं न्यूनतम 20 लाख रूपये जुर्माना प्रस्तावित किया गया है. भय, बल, विवाह का वादा, विवाह, नाबालिग, महिला अवैध व्यापार जैसे अपराधों के लिए न्यूनतम 20 वर्ष एवं अधिकतम आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 30 लाख रूपये का जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है.
विधेयक में अपराध की पुनरावृति पर आजीवन कारावास तक सजा एवं न्यूनतम 50 लाख रूपये का जुर्माना, अवैध धर्मान्तरण में लिप्त संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द करने, राज्य सरकार द्वारा ग्राण्ट बंद किए जाने, जिस स्थान पर अवैध धर्म परिवर्तन हुआ है, उस सम्पत्ति की जांच के बाद जब्ती अथवा गिराए जाने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है. इस प्रस्तावित कानून में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होगा जिसने धर्म परिवर्तन करवाया है.
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धर्मांतरण के मामले की अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनवाई की जाएगी. इस तरह के मामले में जमानत लेने या नहीं लेने न्यायालय का अधिकार लेकिन सरकार के वकील की सुनना होगा. प्रक्रिया और नियम के अनुसार धर्म परिवर्तन करता है तो जायज है लेकिन इसकी सूचना जिला कलेक्टर को देनी होगी.
कलेक्टर जांच के बाद पता करेगा कि मामला सही है या नहीं, यदि सही है तो कलेक्टर की अनुमति के बाद कार्यक्रम किया जा सकेगा. कलेक्टर को सूचना नहीं देने पर 5 लाख का जुर्माना और 5 साल की सजा का प्रावधान किया गया.
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