Rajasthan: पूरा सिस्टम ऑनलाइन होने के बाद फिर भी पासपोर्ट में बनने में लग रहे 17 दिन, लोग परेशान

Jaipur News: राजस्थान में पासपोर्ट बनने में ज्यादा समय लग रहा है. 7 दिन में बनने वाला सामान्य पासपोर्ट 17 दिन में भी नहीं मिल रहा है, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है. 

Rajasthan: पूरा सिस्टम ऑनलाइन होने के बाद फिर भी पासपोर्ट में बनने में लग रहे 17 दिन, लोग परेशान
Image Credit: Jaipur News

Jaipur News: भले ही पासपोर्ट आवेदन की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा सरल और डिजिटल बना दिया हो, लेकिन अब एक नई चुनौती सामने आ रही है. पासपोर्ट बनने में लगने वाला बढ़ता समय.ऑनलाइन आवेदन, अपॉइंटमेंट और ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं के बावजूद आम नागरिक को पासपोर्ट हाथ में आने के लिए पहले से ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है. 7 दिन में बनने वाला सामान्य पासपोर्ट 17 दिन में भी नहीं मिल रहा, और जो इमरजेंसी पासपोर्ट कभी 24 घंटे में हाथ में होता था, वह अब पूरे 7 दिन का इंतजार करा रहा है.

देश में यदि किसी सरकारी सेवा को वर्षों तक रोल मॉडल माना गया तो वह पासपोर्ट सेवा रही है. ऑनलाइन आवेदन, स्लॉट बुकिंग, बायोमेट्रिक, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और तय समय में पासपोर्ट डिलीवरी इन सबके चलते यह सेवा आम आदमी के लिए भरोसे की पहचान बन चुकी थी लेकिन अब यही पासपोर्ट सेवा सिस्टम की सुस्ती और प्रशासनिक देरी का शिकार होती नजर आ रही है.

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हालात ऐसे हैं कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में पासपोर्ट बनवाना फिर से आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया है. आंकड़े चौंकाने वाले हैं. वर्ष 2023 में सामान्य श्रेणी का पासपोर्ट औसतन 9 दिन में जारी हो रहा था लेकिन यह रफ्तार ज्यादा दिन कायम नहीं रह सकी.

2024 में यह अवधि बढ़कर 14 दिन हो गई और अब सामान्य श्रेणी में पासपोर्ट जारी होने में औसतन 17 दिन लग रहे हैं यानी जिस सेवा को समयबद्ध और तेज़ माना जाता था. वहीं, सेवा अब सुस्त सिस्टम का उदाहरण बनती जा रही है. सबसे ज्यादा चिंता का विषय इमरजेंसी पासपोर्ट सेवा है, जिस सेवा का मकसद ही आपात परिस्थितियों में त्वरित राहत देना था. वह अब नाम मात्र की इमरजेंसी बनकर रह गई है. पहले जहां इमरजेंसी श्रेणी में 24 से 48 घंटे के भीतर पासपोर्ट की प्रिंटेड कॉपी आवेदक को मिल जाया करती थी. वहीं, अब इस श्रेणी में भी पासपोर्ट मिलने में औसतन 7 दिन लग रहे हैं. विदेश में इलाज, पढ़ाई, नौकरी या आकस्मिक यात्रा जैसे मामलों में यह देरी कई बार भारी नुकसान का कारण बन रही है.

एक तरफ डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस को लेकर लगातार बड़े दावे हो रहे हैं. पासपोर्ट सेवा को भी पूरी तरह ऑनलाइन और ट्रैकिंग आधारित बताया जाता है लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है. आवेदन ऑनलाइन है, अपॉइंटमेंट ऑनलाइन है, दस्तावेज़ भी डिजिटल हैं-फिर भी फाइलें हफ्तों तक अटकी क्यों रहती हैं, यह सवाल अब आम नागरिक पूछने लगे हैं.

पासपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, इस देरी की सबसे बड़ी वजह लोकल स्तर पर पुलिस वेरिफिकेशन है. अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में पुलिस द्वारा समय पर रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही, जिसके कारण फाइलें अटक जाती हैं. हालांकि सवाल यह भी है कि जब पूरा सिस्टम तकनीक आधारित है तो पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया अब भी पुराने ढर्रे पर क्यों चल रही है. क्या इसके लिए कोई जवाबदेही तय नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में 2 हजार 370 पासपोर्ट के आवेदन तीस दिनों से अधिक के लिए पुलिस सत्यपान के लिए लंबित चल रहे हैं.

बहरहाल, इस देरी का सीधा असर आम नागरिक पर पड़ रहा है. नौकरी, शिक्षा, व्यापार और इलाज जैसे जरूरी मामलों में लोग बार-बार पासपोर्ट कार्यालयों और पुलिस थानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं. लोगों का कहना है कि आवेदन करने के बाद पोर्टल पर केवल 'पुलिस वेरिफिकेशन पेंडिंग' लिखा दिखाई देता है लेकिन यह पेंडिंग कब खत्म होगी, इसकी कोई तय समय सीमा नहीं होती.
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Sneha Aggarwal

Sneha Aggarwal

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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