गाड़ी के पीछे दौड़ने से लेकर सोशल मीडिया से दिक्कतों को खत्म करने वाले हीरो हैं राजस्थान के ये IAS, पढ़ें जितेंद्र सोनी की सक्सेस स्टोरी

Rajasthan News: आईएएस जितेंद्र कुमार सोनी हनुमानगढ़ के निवासी हैं और 2009 बैच के अधिकारी हैं. जालोर में “जाबरो जालोर” पेज, बाढ़ में लोगों की जान बचाने और “चरण पादुका” जैसे अभियानों से चर्चा में आए. पाली, अलवर, नागौर, झालावाड़ में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं.

गाड़ी के पीछे दौड़ने से लेकर सोशल मीडिया से दिक्कतों को खत्म करने वाले हीरो हैं राजस्थान के ये IAS, पढ़ें जितेंद्र सोनी की सक्सेस स्टोरी

IAS Jitender Soni Success Story: आईएएस अधिकारी जितेंद्र कुमार सोनी अक्सर सुर्खियों में रहने वाले प्रशासनिक अफसर हैं. इससे पहले भी वह चर्चा में आए थे, जब वे जालोर जिले के कलेक्टर के रूप में कार्यरत थे. यहां उन्होंने “जाबरो जालोर” नाम से एक फेसबुक पेज शुरू करवाया था, जिस पर स्थानीय लोग अपनी समस्याएं भेजते थे और उन शिकायतों का समाधान सीधे प्रशासन द्वारा कराया जाता था. उनके इस प्रयास की हर तरफ प्रशंसा हुई और आम जनता को भी इसका बड़ा लाभ मिला. जयपुर आने से पहले जितेंद्र सोनी अलवर, नागौर और जालोर जैसे जिलों में भी जिला मजिस्ट्रेट रह चुके हैं. उनके आईएएस बनने की कहानी भी उतनी ही रोचक है जितनी उनकी कार्यशैली.

जितेंद्र कुमार कहां के रहने वाले हैं
जितेंद्र कुमार सोनी का मूल निवास राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के धनसार गांव में है. उनका जन्म 29 नवंबर 1981 को एक कृषक परिवार में हुआ था. बचपन में जब भी कोई कलेक्टर गांव में आता, तो वह उसकी गाड़ी के पीछे दौड़ते थे. यह देखकर उनके पिता का भी सपना बन गया कि एक दिन उनका बेटा भी कलेक्टर बने. पिता लगातार उन्हें प्रेरित करते रहे और मेहनत जारी रही. अंततः उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की और साल 2009 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए. उनकी पहली पोस्टिंग 2011 में पाली जिले में बतौर प्रशिक्षणार्थी आईएएस की हुई. इसके बाद उन्होंने माउंट आबू, झालावाड़ और अन्य जिलों में भी जिम्मेदारियां संभालीं.

आपदा में लोगों की जान बचाई थी
जालोर में कलेक्टर रहते हुए 2016 में आए बड़े बाढ़ संकट के दौरान उन्होंने हालात का निरीक्षण करते समय कई लोगों की जान भी बचाई. इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें उत्कृष्ट जीवन रक्षा पुरस्कार मिला. जालोर में ही उन्होंने “चरण पादुका” अभियान शुरू किया, जिसके माध्यम से नंगे पांव स्कूल जाने वाले बच्चों को जूते-चप्पल वितरित किए गए. कई संस्थाओं ने इस अभियान में हाथ बँटाया. 2018 में झालावाड़ के कलेक्टर बनने पर उन्होंने “रक्तकोष फाउंडेशन” की शुरुआत की और ओ-नेगेटिव रक्त समूह वाले लोगों का एक समूह तैयार कर उन्हें एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा.

अतिरिक्त रोचक जानकारी
जितेंद्र सोनी अपनी सरल कार्यशैली और सीधे संवाद के लिए जाने जाते हैं. वह सोशल मीडिया के माध्यम से जनता की समस्याएं सुनने वाले शुरुआती आईएएस अफसरों में शामिल रहे हैं. शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने कई पहलें कीं, जिनका असर बाद में सरकारी योजनाओं में दिखाई दिया. अपने काम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें बाकी अफसरों से अलग पहचान देती है.

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