राजस्थान की जीवनरेखा बना सरदार सरोवर बांध! बाढ़ और सूखे दोनों से लड़ने की तैयारी पूरी

Rajasthan News: सरदार सरोवर डैम बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट है जो सिंचाई, पेयजल और बिजली में क्रांति ला रहा है. बिजली मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में बांटी जाती है. राजस्थान को नहरों से पानी मिलता है, बाड़मेर में कुछ परियोजनाएं अधर में हैं.

राजस्थान की जीवनरेखा बना सरदार सरोवर बांध! बाढ़ और सूखे दोनों से लड़ने की तैयारी पूरी
Image Credit: sardar sarovar dam

Sardar Sarovar Dam: गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित सरदार सरोवर डैम आज देश की सबसे महत्वाकांक्षी बहुउद्देशीय परियोजनाओं में शुमार है. नर्मदा नदी पर निर्मित यह डैम सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है.

ऊर्जा जरूरतों की बड़ी हिस्सेदारी होगी पूरी
सरदार सरोवर डैम से उत्पादित बिजली का बंटवारा स्पष्ट अनुपात में तय किया गया है. इसमें मध्यप्रदेश को 57 प्रतिशत, महाराष्ट्र को 27 प्रतिशत और गुजरात को 16 प्रतिशत विद्युत आपूर्ति दी जाती है. इस बंटवारे से तीनों राज्यों की ऊर्जा जरूरतों की बड़ी हिस्सेदारी पूरी हो रही है.

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163 मीटर से ऊंचा है डैम
परियोजना की जलविद्युत प्रणाली मुख्य रूप से 2 पावर हाउस पर आधारित है. इनमें रिवर बेड पावर हाउस और कैनाल हेड पावर हाउस प्रमुख हैं. रिवर बेड पावर हाउस में टर्बाइनों के जरिए गिरते हुए पानी की शक्ति को विद्युत में बदला जाता है, जबकि कैनाल हेड पावर हाउस नहरों के प्रवाह से ऊर्जा पैदा करता है. डैम की ऊंचाई 163 मीटर से अधिक है और इसमें 9.5 अरब घन मीटर पानी संग्रहण की क्षमता है. इसकी कुल स्थापित क्षमता 1450 मेगावॉट से अधिक है.

राजस्थान के लिए जरूरी है डैम
यह परियोजना राजस्थान और गुजरात के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है. राजस्थान को डैम से नहरों के माध्यम से पेयजल और सिंचाई का पानी मिल रहा है. खासकर बाड़मेर, जालोर, सिरोही और जोधपुर जैसे रेगिस्तानी जिलों में यह पानी जीवनरेखा साबित हुआ है. वहीं गुजरात के किसानों और उद्योगों को लगातार जल व बिजली आपूर्ति से बड़ी राहत मिली है.

क्या है सरदार सरोवर परियोजना?
सरदार सरोवर परियोजना से राजस्थान का मौजूदा मुद्दा सीधे बांध से जुड़ा नहीं है, बल्कि नर्मदा नहर के विस्तार और उस पर बने जलाशयों से पेयजल व सिंचाई की आपूर्ति से संबंधित है. बाड़मेर जिले में नर्मदा नहर से जुड़े डेमों के जरिये गांवों तक पानी पहुंचाने और आगे होने वाले पेयजल प्रोजेक्ट्स को वित्तीय मंजूरी दिलाने की कई योजनाएं अभी अधर में हैं. इसके अलावा, नर्मदा नदी के जल बंटवारे को लेकर अन्य राज्यों से विवाद, विस्थापन और पर्यावरण जैसी चुनौतियां भी इस परियोजना से जुड़े पहलू रहे हैं.

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SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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