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Jaipur News: राजस्थान में वाहनों की फिटनेस के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन्स खोले जा रहे हैं. इनके खोलने से पहले ही आवेदन प्रक्रिया में की गई गड़बड़ी को लेकर सवाल उठने लगे हैं. परिवहन विभाग अब इन आवेदनों की छंटनी करवा सकता है. दरअसल यह गड़बड़ी जमीनों की लीड डीड में हुई है.
आवेदनों पर कार्यवाही हुई शुरू
ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन्स के आवेदनों पर कार्यवाही शुरू हो गई है. परिवहन विभाग ने 31 जुलाई तक जो आवेदन मांगे थे, उन आवेदनों की स्क्रूटनी कर अब इनके लिए प्राथमिक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिए जाने की कवायद की जा रही है. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में पात्रता के एक बिन्दु को लेकर विवाद शुरू हो गया है.
3500 वर्गमीटर भूमि होना था अनिवार्य
दरअसल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन्स के लिए 2 जुलाई को जारी किए गए दिशा निर्देशों में यह साफ कहा गया था कि एटीएस के लिए 3500 वर्गमीटर भूमि होना अनिवार्य है. भूमि का मालिकाना हक नहीं होने की स्थिति में इसकी पंजीकृत लीज डीड करानी होगी. इस पंजीकृत किरायानामा को लेकर विवाद सामने आ रहा है. दरअसल ज्यादातर आवेदकों ने पंजीकृत किरायानामा व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकृत नहीं करवाया है. अधिकांश आवेदकों ने आवासीय या औद्योगिक श्रेणी में किरायानामा पंजीकृत करवाया है. जबकि दोनों ही तरह के पंजीकृत किरायानामा एटीएस के लिए मान्य नहीं है.
पंजीकृत किरायानामा भी व्यावसायिक श्रेणी का होना जरूरी
चूंकि परिवहन विभाग ने एटीएस को व्यावसायिक श्रेणी का उपक्रम माना है, इसलिए एटीएस खोलने के लिए जमीन का पंजीकृत किरायानामा भी व्यावसायिक श्रेणी का होना चाहिए. विभागीय सूत्रों की मानें तो अनुमानित रूप से व्यावसायिक रजिस्टर्ड लीज में फीस पांच गुना अधिक लगती है. आवासीय और औद्योगिक पंजीकृत किरायानामा के मुकाबले 5 गुना फीस अधिक लगती है.
80 लाख से 1 करोड़ तक है फीस
जयपुर शहर की बात करें तो यहां एक एटीएस खोलने के लिए पंजीकृत किरायानामा की फीस 80 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक हो सकती है. जबकि आवेदकों ने इसके लिए स्टांप एंड रजिस्ट्री विभाग में बहुत कम फीस चुकाई है. अधिकारियों द्वारा इसे कर अपवंचन का मामला भी माना जा रहा है. अब इस पूरे मामले में यह सवाल उठ रहें है कि क्या परिवहन विभाग ऐसे आवेदनों को खारिज करेगा? या फिर इन्हें एक और मौका देते हुए आवेदन में सुधार का अवसर दिया जाएगा. वहीं कर अपवंचन के इस मामले में स्टांप एंड रजिस्ट्रेशन विभाग के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. पूरे प्रदेश में 150 से अधिक आवेदकों ने एटीएस के लिए आवेदन किया है, ऐसे में पूरे मामले में 80 से 100 करोड़ रुपए का कर अपवंचन माना जा रहा है.
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