जयपुर की तंग गलियों में तबाही! एक ही झटके में टूटा घर, उजड़ गया परिवार

Rajasthan News: जयपुर के सुभाष चौक क्षेत्र में जर्जर मकान ढहने से 60 वर्षीय धन्नीबाई की मौत और बहू सुनीता घायल हो गईं. दो मासूम बच्चों ने मां-दादी को मलबे में दबा देखा. प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठे, नोटिस के बावजूद मकान खाली क्यों नहीं कराया गया?

जयपुर की तंग गलियों में तबाही! एक ही झटके में टूटा घर, उजड़ गया परिवार
Image Credit: jaipur house collapsedSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Jaipur News: पुराने शहर में सुबह एक जर्जर मकान मौत का मंजर बनकर ढह गया. हादसे में बुजुर्ग धन्नीबाई (60) की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि उनकी बहू सुनीता (35) घायल हो गईं. घटना सुभाष चौक थाना क्षेत्र के झिलाई हाउस की है. हादसे का दिल दहला देने वाला दृश्य यह था कि बहू अपनी सास को बचाने के लिए उन पर लेट गई और जोर-जोर से मदद के लिए पुकारती रही. लेकिन कमजोर दीवारें और ढही छत से बुजुर्ग की जान नहीं बच सकी.

छोटे बच्चे नहीं भुला पा रहे मंजर
सुबह-सुबह सुभाष चौक क्षेत्र की तंग गलियों में मलबे का ढेर तबाह हुए सपनों की तरह बिखर गया. हादसे में 60 वर्षीय धन्नीबाई की मौत हो गई और उनकी बहू सुनीता (35) मलबे में दबकर घायल हो गईं. घर के बाहर खेलते रहे दो छोटे बच्चे उस मंजर को भुला नही पा रहे है. रीना (11 साल) और प्रिंस (7 साल) ये दोनों मासूम हादसे के गवाह बने. आंगन में खेल रहे दोनों बच्चे आवाज सुनते ही दौड़कर पहुंचे तो देखा कि उनकी मां और दादी मलबे में दबे हुए थे. रीना रोते हुए कहती रही मां दादी को बचाने के लिए उन पर लेट गई थीं...वो चिल्ला रही थीं कि कोई बचा लो. यह हादसा केवल एक जर्जर मकान के गिरने का मामला नहीं है. यह उन दो बच्चों की कहानी है जिनके सिर से पहले पिता का साया गया, अब दादी का हाथ छिन गया और मां अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है. 5 सितंबर को इसी सुभाष चौक इलाके में एक और हवेली गिरी थी. जिसमें बाप-बेटी की जान गई थी. सवाल उठता है कि हर हादसे के बाद निगम की चेतावनी और नोटिस कागजों में ही क्यों रह जाते हैं? क्यों हर बार मासूम जानें जाने के बाद ही प्रशासनिक हलचल होती है?

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क्या बोली नगर निगम की डिप्टी कमिश्नर?
नगर निगम की डिप्टी कमिश्नर सीमा चौधरी ने कहा कि इस जर्जर मकान को लेकर 12 अगस्त को नोटिस जारी किया गया था. सवाल यह है कि अगर नोटिस जारी था तो प्रशासन ने मकान को क्यों नहीं गिराया? क्यों परिवार को सुरक्षित जगह शिफ्ट नहीं कराया गया? उधर भवन मालिक प्रदीप शाह ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें नोटिस मिला ही नहीं. लेकिन मौके पर पहुंचे अफसर ने सबूत दिखा दिया. शाह का कहना था कि वे धन्नीबाई को मकान की देखभाल के लिए 5 हजार रुपए देते थे और उनकी जिद पर ही वहां रहने दिया. सवाल यह है कि जब मकान की हालत बेहद खतरनाक थी, तो मकान मालिक ने परिवार को क्यों वहां रखा? स्थानीय विधायक बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि मकान मालिक झूठ बोल रहा है और उसे नोटिस मिला था. अब पवन मलिक पर नगर निगम प्रशासन की ओर से एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी. उन्होंने मृतक परिवार को खुद की तरफ से 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की. साथ में सरकार की ओर से भी मदद दिलाने का आश्वासन दिया. लेकिन लोगों का कहना है कि हर हादसे के बाद सहायता राशि बांटने और बयान देने के बजाय निगम और प्रशासन को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए.

सैकड़ों जर्जर इमारत हैं
बहरहाल, हवामहल और किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में सैकड़ों जर्जर इमारतें हैं. अधिकांश किराए पर या चौकीदारी के लिए दी गई हैं. इनमें रहने वाले लोग हर दिन मौत के साए में जी रहे हैं. यह हादसा चेतावनी है कि अगर सिर्फ नोटिस पर ही प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है, तो आने वाले दिनों में और कितनी धन्नीबाई इस लापरवाही की बलि चढ़ेंगी?

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SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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