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Jhunjhunu News: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गाडराटा गांव में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर एक भावुक दृश्य देखने को मिला. जहां पूरे देश में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की दुआ कर रही थीं, वहीं यहां की बहनों ने अपने शहीद भाइयों को भी नहीं भुलाया. वे उन्हें जीवित मानते हुए उनकी प्रतिमाओं की कलाई पर राखी बांधकर आशीर्वाद लेती हैं.
नम आंखों से भाई की कलाई पर बांधी राखी
इसी परंपरा के तहत शौर्य चक्र से सम्मानित शहीद नेत्रभान सिंह की बहन कमलेश कंवर ने नम आंखों से अपने भाई की प्रतिमा पर राखी बांधी. राखी बांधते समय वे भावुक होकर प्रतिमा से लिपट गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. कमलेश कंवर हर साल ससुराल गणेश्वर से गाडराटा आकर यह संकल्प निभाती हैं। उनका कहना है, “मेरा भाई देश के लिए शहीद हुआ, लेकिन रक्षाबंधन के दिन उसकी उपस्थिति और आशीर्वाद का अहसास होता है.”
1992 में आतंकवाद से लड़ते हुए थे शहीद
शहीद नेत्रभान सिंह 1992 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ मोर्चे पर लड़ते हुए दुर्दांत आतंकी कामरान गाजी के एनकाउंटर में वीरगति को प्राप्त हुए थे. उनकी शौर्यपूर्ण वीरता के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने उन्हें शौर्य चक्र से अलंकृत किया था.
भाई-बहन का रिश्ता सदैव रहता है अमर
भले ही ये बहनें आज अपने भाइयों को आंखों से नहीं देख सकतीं, लेकिन उनके दिलों में भाई-बहन का रिश्ता अमर है. हर साल राखी बांधते हुए वे यह संदेश देती हैं कि देश के वीर सपूत केवल परिवार के ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के अभिन्न अंग होते हैं, और उनका प्रेम व बलिदान सदैव याद किया जाएगा.
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