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Jaipur News: राजस्थान में फायर भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े को लेकर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने बड़ी कार्रवाई की है. साल 2021 की फायर ऑफिसर भर्ती परीक्षा में घोटाले का खुलासा करते हुए एसओजी ने असिस्टेंट फायर ऑफिसर को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि फर्जी डॉक्यूमेंट, संदिग्ध डिग्रियों और पैसों के दम पर सोबिया फायर भर्ती परीक्षा देकर अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी हासिल की. खास बात यह है कि फायर ऑफिसर भर्ती परीक्षा में SOG की पहली गिरफ्तारी है.
साल 2021 की फायर भर्ती परीक्षा, जहां कागजों पर योग्यता और मैदान में ताकत के दम पर नौकरी मिलनी थी. लेकिन असल में यहां चला नोटों और फर्जीवाड़ा का खेल. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप राजस्थान ने फायर भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा के इसी खेल का भंडाफोड़ करते हुए असिस्टेंट फायर ऑफिसर सोबिया सैयद को गिरफ्तार किया है. सोबिया जयपुर के मालवीय नगर में तैनात है. आरोप है कि सोबिया सैयद ने साल 2021 की फायर भर्ती परीक्षा फर्जी तरीके से पास की थी. जांच में सामने आया है कि सोबिया सैयद ने एक ही समय पर अलग-अलग डिग्रियां और सर्टिफिकेट हासिल करने का दावा किया, जो नियमों के विपरीत था. इन फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर न सिर्फ लिखित परीक्षा पास की, बल्कि फिजिकल टेस्ट में भी नियमों से ज्यादा मार्क्स हासिल किए गए.
एसओजी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि फिजिकल टेस्ट में लाखों रुपए का लेन-देन हुआ और भर्ती परीक्षा कमेटी के कुछ सदस्यों ने पैसों के बदले ज्यादा मार्क्स दिए. योग्यता के अनुसार जितने अंक मिलने चाहिए थे, उससे कहीं अधिक अंक दिए जाने पर संदेह गहराया. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को इस पूरे घोटाले को लेकर शिकायत मिली थी. जिसमें फर्जी डॉक्यूमेंट, फिजिकल में धांधली और अवैध लाभ देने के आरोप शामिल थे. शिकायत की पुष्टि के बाद एसओजी ने दस्तावेजों की जांच की और फिर गिरफ्तारी की कार्रवाई की. जांच के दायरे में अब अन्य असिस्टेंट फायर ऑफिसर और दमकल कर्मी भी हैं. एसओजी को आशंका है कि फायर भर्ती परीक्षा में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था. जिसमें दलाल, परीक्षा कमेटी के सदस्य और अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं.
SOG का अनुमान है कि फिजिकल टेस्ट में लाखों रुपए देकर धांधली की गई. भर्ती कमेटी के कुछ लोगों ने मिलकर मार्क्स बढ़ाने का सौदा किया. यानी, सरकारी नौकरी खुलेआम बिकती रही और सिस्टम आंख मूंदे बैठा रहा. फायर भर्ती परीक्षा में हुई इस पहली गिरफ्तारी ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एसओजी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, और भी बड़े नाम सामने आने की संभावना है.
गिरफ़्तार आरोपी से पूछताछ में सामने आया कि लिखित परीक्षा के बाद फिजिकल टेस्ट प्रैक्टिकल एग्जाम में अपने वास्तविक प्रदर्शन से कहीं अधिक अंक प्राप्त किए गए. जांच में यह तथ्य सामने आया कि अभियुक्ता ने एक ही शैक्षणिक सत्र में एक से अधिक डिग्री एवं डिप्लोमा प्राप्त किए और दस्तावेज सत्यापन समिति के समक्ष एक से अधिक डिप्लोमा प्रस्तुत किए. जांच के दौरान यह भी सामने कि आरोपी द्वारा राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कोटा से नियमित मोड में बी.टेक. की डिग्री प्राप्त करने के साथ-साथ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग, नागपुर (महाराष्ट्र) से फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग का एक वर्षीय डिप्लोमा भी नियमित मोड में प्राप्त किया गया.
इसके अतिरिक्त, एन.आई.एफ. एस.ई., नागपुर से लिखित परीक्षा का परिणाम आने के बाद फिर सब फायर ऑफिसर" का डिप्लोमा प्राप्त किया गया तथा उसी शैक्षणिक सत्र में सिंघानिया यूनिवर्सिटी, बड़ी पिचेरी, झुंझुनूं (राजस्थान) से भी "सब फायर ऑफिसर" का डिप्लोमा प्राप्त किया गया, जबकि दोनों संस्थानों के बीच की दूरी लगभग 900 किलोमीटर है. आरोपी द्वारा एन.आई.एफ.एस.ई., नागपुर से प्राप्त डिप्लोमा के आधार पर कर्मचारी चयन बोर्ड एवं स्वायत्त शासन विभाग को गुमराह करते हुए सहायक अग्निशमन अधिकारी के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली गई. वर्तमान में अभियुक्ता मालवीय नगर जोन, जयपुर में सहायक अग्निशमन अधिकारी के पद पर कार्यरत थी.
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