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Rajasthan Panchayat Chunav News: लोकसभा, विधानसभा और नगर निगम चुनावों में महिला कार्मिकों ने न सिर्फ मतदान केंद्र संभाले, बल्कि लोकतंत्र की सबसे मजबूत तस्वीर भी पेश की. लेकिन अब पंचायत चुनाव में वही महिला कार्मिक पोलिंग बूथ से बाहर होंगी. राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार पंचायत चुनावों के लिए अलग और चौंकाने वाली नीति अपनाई है जहां महिला और दिव्यांग कार्मिकों को मानवीय आधार पर मतदान दलों की ड्यूटी से दूर रखा जा रहा है.
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लोकसभा, विधानसभा और नगर निगम जैसे बड़े चुनावों में जहां महिला कार्मिकों के हाथ में पूरे-पोलिंग बूथ की कमान रहती है. वहीं इस बार पंचायत चुनाव में तस्वीर बिल्कुल उलट होगी. आगामी पंचायत चुनावों में महिला और दिव्यांग कार्मिकों को मतदान दल (पोलिंग पार्टी) की ड्यूटी से बाहर रखा जाएगा. राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक पंचायत चुनावों में महिला और दिव्यांग कर्मियों को यथासंभव पोलिंग पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा. दरअसल पंचायत चुनावों में मतदान सिर्फ एक दिन का काम नहीं होता. मतदान के बाद देर रात तक काउंटिंग, अगले दिन उपसरपंच का चुनाव और कई जगहों पर तीन दिन तक उसी मतदान केंद्र पर रुकने की मजबूरी. इन तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए महिला और दिव्यांग कार्मिकों को पोलिंग पार्टियों से अलग रखा गया है.
राज्य निर्वाचन आयोग एक आदेश जारी करके प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को मतदान दल गठन को लेकर गाइडलाइन जारी की हैं. गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक पंचायत सर्किल के लिए एक रिटर्निंग अधिकारी की नियुक्ति रहेगी जो उस पंचायत के तहत आने वाले सभी मतदान दलों के कार्यों का पर्यवेक्षण करेगा. प्रत्येक मतदान बूथ पर पांच सदस्यीय मतदान दल तैनात किया जाएगा. इस दल में एक मतदान अधिकारी और चार सहायक मतदान अधिकारी शामिल होंगे. जब जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच और पंच का चुनाव एक साथ कराया जाएगा, तब एक ही मतदान दल द्वारा चारों पदों के लिए मतदान प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी. वहीं यदि ये चुनाव अलग-अलग चरणों में होंगे तो अलग-अलग मतदान दल गठित किए जाएंगे. कायदि किसी पंचायत सर्किल में वार्डों की संख्या 20 से अधिक होती है, तो प्रत्येक अतिरिक्त 15 वार्डों पर रिटर्निंग अधिकारी की सहायता के लिए एक सहायक रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है.
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार रिटर्निंग अधिकारी, मतदान अधिकारी से उच्च पद का अधिकारी होगा. मतदान अधिकारी का स्तर विधानसभा या लोकसभा चुनावों में नियुक्त पीठासीन अधिकारी के समकक्ष रहेगा. मतदान दल में चार सहायक मतदान अधिकारियों में से एक का स्तर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का होगा. किसी मतदान दल में ऐसा कोई अधिकारी या कर्मचारी नियुक्त नहीं किया जाएगा जो उसी पंचायत समिति क्षेत्र का निवासी या पदस्थ हो, जहां वह मतदान केंद्र स्थित है. पंचायत समिति के अधीनस्थ अध्यापकों को अन्य पंचायत समिति क्षेत्रों में तैनात किया जा सकेगा. मतदान दलों के गठन से पहले सभी शासकीय और अर्द्ध-शासकीय विभागों के कर्मचारियों की अद्यतन सूचियां तैयार कर उन्हें आपस में मिलाकर दलों का गठन किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार का पक्षपात न हो. रिटर्निंग अधिकारी और मतदान दलों को दो चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा.
आपात स्थिति या पुनर्मतदान की आवश्यकता को देखते हुए जिला या ब्लॉक स्तर पर 10 प्रतिशत मतदान दल आरक्षित रखे जाएंगे. वहीं केंद्र सरकार और उसके अधीनस्थ संस्थाओं के कार्मिकों, उम्मीदवारों से संबद्ध कर्मचारियों और अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े कार्मिकों की ड्यूटी मतदान दलों में नहीं लगाई जाएगी. वहीं किसी पोलिंग बूथ पर अगर जरूरत पड़ती है कि कोई महिला बुर्का या घूंघट में आती है तो उसकी पहचान के लिए स्थानीय स्तर पर नियुक्त किसी भी महिला कर्मचारी का सहयोग लिया जा सकता है.
पंचायत चुनावों में इस बार प्रशासन ने नियमों से ज्यादा परिस्थितियों को प्राथमिकता दी है. बड़े चुनावों में जहां महिला कार्मिक लोकतंत्र की कमान संभालती नजर आती हैं, वहीं गांव की जमीनी हकीकत को देखते हुए पंचायत चुनावों में उन्हें राहत दी गई है.
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