राजस्थान सरकार का बड़ा ऐलान, अब 108 एम्बुलेंस कर्मचारी नहीं कर पाएंगे हड़ताल, जानें क्या है रेस्मा!

RESMA In Rajasthan: जयपुर में गृह विभाग ने 108 एम्बुलेंस सहित आपातकालीन सेवाओं पर रेस्मा लागू कर हड़ताल पर रोक लगा दी. 19 सितंबर से छह महीने तक ये सेवाएं अतिआवश्यक घोषित हैं, ताकि जनता को 24 घंटे बिना रुकावट स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें.

राजस्थान सरकार का बड़ा ऐलान, अब 108 एम्बुलेंस कर्मचारी नहीं कर पाएंगे हड़ताल, जानें क्या है रेस्मा!
Image Credit: rajasthan ambulance resma

Rajasthan News: राजस्थान की राजधानी जयपुर से बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. जिसके बाद से प्रदेश में अब 108 आपातकालीन एम्बुलेंस कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे. गृह विभाग ने आपातकालीन सेवाओं पर रेस्मा लगाया है. सरकार का यह फैसला आपातकालीन सेवाओं को बाधित होने से रोकने के लिए यह बड़ा कदम बताया जा रहा है. आदेश के अनुसार 108 एम्बुलेंस सेवा के साथ-साथ 104 जननी एक्सप्रेस, ममता एक्सप्रेस, 104 चिकित्सा परामर्श सेवाएं और कॉल सेंटर सेवाओं में हड़ताल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

अगले 6 महीने तक लागू रहेगा कानून

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गृह विभाग ने इन सभी सेवाओं को 19 सितंबर से अगले छह महीने तक अतिआवश्यक सेवाओं की श्रेणी में घोषित कर दिया है. सरकार का कहना है कि आपातकालीन सेवाओं पर किसी भी तरह का असर जनता की जान पर भारी पड़ सकता है, इसलिए इन्हें बाधित नहीं होने दिया जाएगा. आदेश लागू होने के बाद अब कर्मचारी हड़ताल नहीं कर पाएंगे और आमजन को 24 घंटे ये सेवाएं बिना रुकावट मिलती रहेंगी.

आपातकाली सुविधाओं में क्या होता है रेस्मा?
आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं में "रेस्मा" का मतलब रेशम से बने खास बायोमटेरियल से है. इसे वैज्ञानिक ऊतक की मरम्मत करने, शरीर को सुरक्षित रखने और कई तरह की मेडिकल जांच में काम में लेते हैं. रेशमा का उपयोग घावों को जल्दी भरने में किया जाता है. इसके अलावा यह दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया को पहचानने में भी मदद करता है. इसलिए इसे आधुनिक इलाज और नैदानिक परीक्षणों में बहुत उपयोगी माना जाता है.

केंद्रीय कानून नहीं है रेस्मा
आपको बता दें कि रेस्मा कोई केंद्रीय कानून नहीं है. हालांकि राज्य सरकारें कभी-कभी कुछ सेवाओं में हड़ताल रोकने के लिए रेस्मा नामक कानून लागू करती हैं. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जनता को जरूरी सेवाएं लगातार मिलती रहें. जब रेस्मा लागू होता है, तो उस सेवा के कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते. यह कानून उन कर्मचारियों पर लागू होता है जो अनिवार्य सेवाओं में काम करते हैं, जैसे कि स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक परिवहन या बिजली आपूर्ति. अगर कोई कर्मचारी रेस्मा लागू होने के बावजूद हड़ताल करता है, तो उसे छह महीने तक जेल हो सकती है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.

कोई स्थायी कानून नहीं है रेस्मा
रेस्मा कोई स्थायी कानून नहीं है. इसे किसी विशेष समय या किसी विशेष सेवा में व्यवधान रोकने के लिए लागू किया जाता है. इसका मतलब यह है कि हर राज्य में यह हमेशा लागू नहीं होता. राज्य सरकारें अपनी जरूरत के अनुसार इसे अस्थायी तौर पर लागू कर सकती हैं. इस कानून के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि जरूरी सेवाओं में किसी भी प्रकार की रुकावट न आए. जनता को स्वास्थ्य, परिवहन या बिजली जैसी आवश्यक सुविधाएं निरंतर मिलती रहें. इसी वजह से रेस्मा को अनिवार्य सेवाओं की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है.

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SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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