किसानों की फसलें बारिश में डूबीं, ऑनलाइन गिरदावरी प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ी से मुआवजा विलंबित

Rajasthan News: प्रदेशभर में आसमान से बरस रही बेतहाशा बारिश अब किसानों के लिए आफत बन गई है. खेतों में पानी भर जाने से जहां फसलें पूरी तरह प्रभावित हो चुकी हैं.

किसानों की फसलें बारिश में डूबीं, ऑनलाइन गिरदावरी प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ी से मुआवजा विलंबित
Image Credit: Rajasthan NewsSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Rajasthan News: प्रदेशभर में आसमान से बरस रही बेतहाशा बारिश अब किसानों के लिए आफत बन गई है. खेतों में पानी भर जाने से जहां फसलें पूरी तरह प्रभावित हो चुकी हैं. वहीं नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी ऑनलाइन गिरदावरी भी अधर में अटक गई है. नतीजा किसान और पटवारी दोनों ही अब मौसम साफ होने और तकनीकी दिक्कतें खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं.

प्रदेशभर में आसमान से बरस रही आफत अब किसानों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगी है. जरूरत से कहीं ज्यादा हुई बारिश ने खेत-खलिहानों को तालाब बना दिया है. हालत यह है कि मेहनत और उम्मीद से बोई गई फसलें पानी में डूबकर चौपट हो गई हैं. किसान अब बेबस निगाहों से आसमान की ओर ताक रहे हैं कि कब बादल हटेंगे और सूरज निकलेगा. लेकिन किसानों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं.

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नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी गिरदावरी भी इस बार बरसाती पानी में फंसी पड़ी है. खेतों में पानी और कीचड़ होने से पटवारियों का खेतों तक पहुंचना असंभव हो रहा है. दूसरी ओर सरकार की पारदर्शिता की मंशा से शुरू की गई डीसीएस गिरदावरी ऐप जमीनी हकीकत में "डिजिटल जाल" साबित हो रही है. ऐप की तकनीकी सेटिंग्स के चलते पटवारियों को खेत के भीतर कम से कम 20 मीटर तक जाना अनिवार्य है.

ऐसे में खेतों में घुटनों तक पानी, कीचड़ और झाड़ियों के बीच पटवारियों के लिए हर कदम जोखिम भरा बन चुका है. गिरदावरी एप में लोकेशन का एरिया कम करने से पटवारियों को गिरदावरी करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पहले खेत की सीमा से भी लोकेशन एंट्री मान्य हो जाती थी, लेकिन अब ऐप खेत के अंदर की पिन ही पकड़ता है. कई जगह किसानों ने तारबंदी कर खेतों के गेट तक पर ताला डाल दिया है.

राजस्थान पटवार संघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र कवियां का कहना हैं कि खेतों में भरा पानी गिरदावरी करना नामुमकिन बना रहा है. पहले खेत की सीमा से भी लोकेशन एंट्री हो जाती थी, लेकिन अब ऐप खेत के अंदर की पिन ही पकड़ता है. कई जगह तो किसानों ने तारबंदी कर खेतों के गेट तक ताले डाल दिए हैं. संघ ने इस संबंध में राजस्व मंडल को पत्र लिखकर लोकेशन डिसेबल करवाने की मांग की है, ताकि गिरदावरी समय पर पूरी हो सके और नुकसान-खराबे की 7डी रिपोर्ट तैयार की जा सके.

राज्य सरकार के निर्देशानुसार कम से कम 20 फीसदी गिरदावरी स्वयं किसान द्वारा करवाई जानी है. जयपुर में पिछले कुछ दिनों में ऑनलाइन गिरदावरी में दिक्कतें आ रही हैं. आप खसरा सीमा में नही हैं, खसरा सीमा में गिरदावरी करें, आप की स्थान निकटतम सीमा से दूर हैं. इन सभी कारणों से गिरदावरी का काम बहुत स्लो चल रहा है.

गिरदावरी करते समय संबंधित ग्राम का नक्शा शो नहीं होता, जिसके कारण गिरदावरी नहीं हो रहीं. बारिश का दौर जारी रहने और अतिवृष्टि-मौके पर जलभराव की स्थिति में गिरदावरी नहीं की जा सकती. प्रदेश में अब तक 41.61 फीसदी गिरदावरी पूरी की जा चुकी हैं.

उधर, राजस्व मंत्री जोगाराम पटेल ने माना है कि ऑनलाइन गिरदावरी में तकनीकी समस्याएं आ रही हैं. उन्होंने कहा कि मामला राजस्व विभाग के संज्ञान में लाया गया है. तकनीकी खामियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है, ताकि किसानों की गिरदावरी समय पर पूरी हो और उन्हें मुआवजा मिल सके.

कुल मिलाकर किसानों की फसलें बरसात में डूब चुकी हैं और अब मुआवजे की उम्मीद भी तकनीकी पेच में उलझी दिखाई दे रही है. सवाल यह है कि जब तक ऐप की दिक्कतें दूर नहीं होतीं और खेतों में पानी नहीं उतरता, तब तक गिरदावरी कैसे पूरी होगी और किसान अपनी मेहनत का मुआवजा कब पा सकेंगे.

बहरहाल, बरसात का पानी खेतों में पड़ा है. किसानों की उम्मीदें उसी पानी में डूबी हुई हैं. नुकसान का सही आकलन तभी हो पाएगा जब गिरदावरी पूरी होगी, लेकिन डिजिटल सेटिंग्स और तकनीकी दिक्कतें इस प्रक्रिया को और भी मुश्किल बना रही हैं. सवाल यही है जहां खेत तक पहुंचना ही नामुमकिन है. वहां क्लिक से राहत कैसे पहुंचेगी. किसानों की नजरें अब सिर्फ आसमान पर नहीं, बल्कि सिस्टम पर भी टिकी हैं कि कौन पहले मदद करेगा.

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Aman Singh

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अमन सिंह को डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव है और वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. वे राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं और उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अच्छे तरीके से प्रस्तुत करने में सक्षम हैं. करीब 3 साल के डिजिटल मीडिया अनुभव के साथ अमन ने न्यूज़ प्रोडक्शन, कंटेंट क्रिएशन और स्टोरीटेलिंग में अपनी मजबूत पहचान बनाई है. जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
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