Rajasthan News: जयपुर में सीवर सफाई के दौरान लापरवाही से बड़ा हादसा हुआ, जहरीली गैस से दो मजदूरों की मौत हो गई. बिना सुरक्षा उपकरण काम कराने पर ठेकेदार और निगम सिस्टम पर सवाल उठे, जांच के आदेश दिए गए और मुआवजे की मांग तेज हो गई.
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Jaipur News: जयपुर शहर में सीवर सफाई के दौरान एक बार फिर सिस्टम की खामियां उजागर हो गईं. झोटवाड़ा जोन के शेखावत मार्ग पर हुए दर्दनाक हादसे ने नगर निगम की व्यवस्थाओं और ठेकेदारी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मानसून से पहले सफाई, लेकिन मौत बन गई लापरवाही
झोटवाड़ा जोन में 200 फीट रोड पर शेखावत मार्ग स्थित वार्ड नंबर 24 में मानसून से पूर्व सीवरेज टैंक सफाई के लिए बिना सुरक्षा संसाधनों के मजदूरों को सीवरेज टैंक में ठेकेदार ने उतार दिया. सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान दो मजदूर जहरीली गैस की चपेट में आ गए. बताया जा रहा है कि सीवर चैंबर में उतरते ही दम घुटने लगा और दोनों बेहोश हो गए. मौके पर पहुंची करधनी थाना पुलिस ने उन्हें बाहर निकालकर कांवटिया अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने अजय (पुरानी बस्ती) और रामबाबू (बनीपार्क) को मृत घोषित कर दिया.
सुरक्षा उपकरण नहीं, सीधे मौत के मुंह में धकेला
हादसे के पीछे सबसे बड़ी वजह लापरवाही बताई जा रही है. आरोप है कि ठेकेदार अरविंद शेखावत की कंपनी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मजदूरों से सीवर की सफाई करवा रही थी. न मास्क, न ऑक्सीजन सिलेंडर, न कोई सेफ्टी गियर ऐसे में जहरीली गैस ने उनकी जान ले ली.
कानून की खुली अनदेखी
देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग पर कानूनन रोक है और अदालतें भी कई बार सख्त निर्देश दे चुकी हैं कि सीवर सफाई केवल मशीनों से हो. अगर किसी विशेष स्थिति में व्यक्ति को उतारना पड़े, तो जीवनरक्षक उपकरण अनिवार्य हैं. इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है.
सफाई कर्मचारी यूनियन का आरोप-‘कागजों में सुरक्षा, जमीन पर खतरा
वाल्मीकि सफाई कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया ने सीधे तौर पर ठेकेदार और निगम अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि JEN, AEN और XEN स्तर के अधिकारी केवल कागजों में नियम पूरे दिखाते हैं, जबकि हकीकत में मजदूरों को बिना सुरक्षा के सीवर में उतारा जा रहा है.
सख्त कार्रवाई और मुआवजे की मांग
संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उनकी प्रमुख मांगें हैं. जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की गिरफ्तारी,मृतकों के परिजनों को एक-एक सरकारी नौकरी,एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो जयपुर सहित पूरे राजस्थान में सफाई कार्य का बहिष्कार किया जाएगा.
निगम आयुक्त का जवाब-जांच के बाद कार्रवाई
नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने घटना को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा कि ठेकेदार और निगम स्टाफ, दोनों की भूमिका की जांच होगी और जहां भी लापरवाही पाई जाएगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी.गौरतलब है कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऐसे हादसे कोई नई बात नहीं हैं. बार-बार चेतावनी और अदालतों के आदेशों के बावजूद सीवर सफाई का काम अब भी पुराने और खतरनाक तरीकों से किया जा रहा है.
सवाल अब भी वही-जिम्मेदार कौन?
हर हादसे के बाद जांच और मुआवजे की बात होती है, लेकिन सिस्टम में बदलाव नहीं दिखता. सवाल यही है क्या इन मौतों के बाद भी सीवर सफाई का तरीका बदलेगा, या फिर अगली त्रासदी का इंतजार किया जाएगा?
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