शिक्षा-स्कॉलरशिप और हेल्थ स्कीम पर संकट, राजस्थान के 1 करोड़ मासूमों का भविष्य दांव पर! जानें पूरा मामला

Rajasthan News: राजस्थान में करीब 1 करोड़ बच्चों का आधार अपडेट नहीं हुआ है. UIDAI की रिपोर्ट में सामने आया कि बायोमेट्रिक जानकारी अधूरी है. इससे शिक्षा, छात्रवृत्ति और स्वास्थ्य योजनाओं में दिक्कतें आ सकती हैं. सरकार ने विशेष कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं.

शिक्षा-स्कॉलरशिप और हेल्थ स्कीम पर संकट, राजस्थान के 1 करोड़ मासूमों का भविष्य दांव पर! जानें पूरा मामला
Image Credit: AADHAR CARD UPDATAION CENTER

Jaipur News: देशभर में आधार को सबसे अहम पहचान पत्र माना जाता है, लेकिन राजस्थान इस मामले में बच्चों के आधार अपडेटेशन को लेकर काफी पीछे है. ताज़ा आंकड़ों ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है. यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) और राज्य स्तरीय सलाहकार बोर्ड की हालिया बैठक में सामने आया कि प्रदेश के करीब एक करोड़ बच्चों का आधार अपडेट नहीं हुआ है.

राजस्थान में 1 करोड़ बच्चों का आधार नहीं है अपडेट
राजस्थान में करीब 1 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जिनका आधार अपडेट नहीं हुआ है. यानी इन बच्चों की डिजिटल पहचान अधूरी है. नतीजा यह कि भविष्य में शिक्षा से लेकर छात्रवृत्ति और चिकित्सा योजनाओं तक में इन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. हाल ही में यूनिक आइडेंटिफिकेशन ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) और राज्य स्तरीय सलाहकार बोर्ड की बैठक में ये डेटा सामने आए. राज्य में 5 से 7 साल के 41 लाख और 15 से 17 साल के 63 लाख बच्चों का आधार अब तक अपडेट नहीं हुआ है. आधार कार्ड तो बना दिए गए, लेकिन बायोमेट्रिक जानकारी (फिंगर प्रिंट और आईरिस स्कैन) दर्ज नहीं होने से ये अधूरे रह गए. सबसे बड़ी चिंता यह है कि बिना अपडेट आधार के बच्चों को आने वाले समय में सरकारी योजनाओं, स्कूल एडमिशन, छात्रवृत्ति और हेल्थ स्कीम का लाभ उठाने में दिक्कतें आ सकती हैं. मुख्य सचिव ने शिक्षा, चिकित्सा और महिला बाल विकास विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर में विशेष कैंप लगाकर बच्चों की पहचान पूरी की जाए. खासकर स्कूलों में कैंप लगाए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों का आधार अपडेट हो सके.

Add Zee News as a Preferred Source

UIDAI ने जारी किया डेटा
यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इन बच्चों के आधार को अब माता-पिता के आधार से भी लिंक करने के निर्देश दिए है. क्योंकि कई बच्चों के आधार में एड्रेस (पता) गलत होने की शिकायतें आई है. ऐसे में बच्चों के एड्रेस को माता-पिता के डॉक्यूमेंट के बेस पर ही सुनिश्चित किया जा सके, इसके लिए माता-पिता के आधार अन्य पहचान पत्र को इससे लिंक किया जाएगा. आपको बता दें कि अब तक जितने भी छोटे बच्चों के आधार पंजीयन कार्ड बने है. उसमें ज्यादातर जन्म प्रमाण पत्र के बेस पर बने है. UIDAI से जारी डेटा के बाद मुख्य सचिव ने चिकित्सा, महिला एवं बाल विकास और शिक्षा विभाग को प्रदेश में इस अपडेशन के लिए विशेष कैंप लगाने के निर्देश दिए है. साथ ही सभी रजिस्ट्रार और भारतीय डाक सर्विस को भी अपने यहां बच्चों के नए रजिस्ट्रेशन के आधार कैंप लगान के लिए कहा है. विशेषकर शिक्षा विभाग को सरकारी स्कूलों के साथ-साथ प्राइवेट स्कूलों में भी कैंप लगाने के निर्देश दिए है. वही आंगनबाड़ी केंद्रों में भी कैम्प लगाने के निर्देश दिये है. ताकि वहां आने वाले बच्चों के आधार को अपडेट किया जा सके.

सरकारी योजनाओं का कैसे मिलेगा लाभ
राज्य में एक करोड़ बच्चों का आधार अपडेट होना न केवल प्रशासनिक चुनौती है. बल्कि इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं और सेवाओं पर भी पड़ेगा. आधार आधारित डाटा से ही बच्चों को मिलने वाले लाभ जैसे छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य योजनाएं और पोषण कार्यक्रम समय पर पहुंच पाते हैं. ऐसे में अपडेटेशन में देरी बच्चों को हक से वंचित भी कर सकती है.

राजस्थान की ताज़ा ख़बरों के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहां पढ़ें Rajasthan News और पाएं Jaipur News हर पल की जानकारी. राजस्थान की हर खबर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार. जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!

ट्रेंडिंग न्यूज़

About the Author

SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
Read More