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Petrol Diesel Price Hike: राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है. बढ़ती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के असर से आम लोगों पर महंगाई का नया बोझ पड़ने लगा है. तेल कंपनियों की ओर से जारी नए रेट के अनुसार, पेट्रोल 3 रुपये 25 पैसे प्रति लीटर और डीजल 3 रुपये 02 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है.
नई दरों के बाद जयपुर में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 108 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है. वहीं डीजल अब 93.26 रुपये प्रति लीटर के भाव से मिल रहा है. ईंधन की कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी से वाहन चालकों की चिंता बढ़ गई है. खासतौर पर रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर आने वाले दिनों में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है. सब्जियां, फल, खाद्यान्न और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई महंगी होने से बाजार में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा है. इसके चलते देशभर में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. राजस्थान में भी इसका सीधा असर आम जनता पर दिखाई देने लगा है.
पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों से मध्यम वर्ग और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. वहीं ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों से परिचालन लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा.
पेट्रोल और डीजल की सप्लाई तथा बिक्री को लेकर नया विवाद
दूसरी ओर राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई तथा बिक्री को लेकर नया विवाद सामने आ गया है. ऑयल कंपनियों के मौखिक निर्देशों के बाद राज्य के कई पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमा तय करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं. पेट्रोल पंप संचालकों का आरोप है कि एक तरफ कंपनियां डिपो से ईंधन की सप्लाई कम कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को सीमित मात्रा में ही पेट्रोल और डीजल देने के निर्देश दिए जा रहे हैं.
ज्यादातर निर्देश मोबाइल संदेशों और मौखिक रूप से दिए जा रहे
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स से जुड़े प्रतिनिधियों ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के कार्यकारी निदेशक एवं राज्य स्तरीय समन्वयक मनोज गुप्ता को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. डीलर्स का कहना है कि ज्यादातर निर्देश मोबाइल संदेशों और मौखिक रूप से दिए जा रहे हैं. इस संबंध में सरकार या ऑयल कंपनियों की तरफ से अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है.
कंपनियों ने ईंधन बिक्री की अलग-अलग सीमा तय की
डीलर्स के मुताबिक अलग-अलग कंपनियों ने ईंधन बिक्री की अलग-अलग सीमा तय की है. आरोप है कि आईओसीएल की ओर से 50 हजार रुपए तक डीजल और 5 हजार रुपए तक पेट्रोल देने की सीमा निर्धारित की गई है. वहीं बीपीसीएल और एचपीसीएल की तरफ से करीब 49 से 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल तक ही देने के निर्देश जारी किए गए हैं. कई पेट्रोल पंपों पर इससे संबंधित पोस्टर भी लगाए गए हैं, ताकि ग्राहकों को पहले से इसकी जानकारी मिल सके.
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि यदि कोई डीलर तय सीमा से अधिक ईंधन बेचता है तो उसके पंप की बिक्री बंद करने जैसी कार्रवाई की जा रही है. इससे संचालकों के बीच असमंजस और नाराजगी का माहौल है.
डीलर्स ने आशंका जताई है कि अचानक लागू की गई इस व्यवस्था से पेट्रोल पंपों पर विवाद और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है. खासकर किसानों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं खुले में बैरल या ड्रम में डीजल देने पर रोक जैसी स्थिति बनने से ग्रामीण इलाकों में भी नाराजगी बढ़ने लगी है.
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