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Rajasthan PHED Billing Scam: राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की बिलिंग प्रणाली खुद 'प्यास' से जूझ रही है. राज्य में पेयजल बिलिंग और राजस्व वसूली का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले दो वर्षों में उपभोक्ताओं पर 818 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बकाया जमा हो गया है. आलम यह है कि न तो वक्त पर बिल बांटे जा रहे हैं और न ही राजस्व की वसूली हो पा रही है.
बकाया का गणित: वसूली में 50% की गिरावट
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में कुल 1,800 करोड़ रुपये के बिल जारी होने थे, लेकिन विभाग केवल 980 करोड़ रुपये ही वसूल पाया है. यानी करीब 50 प्रतिशत राजस्व अब भी सरकारी खजाने से बाहर है.
राजधानी में सबसे बड़ी लापरवाही
राजस्व वसूली में सबसे फिसड्डी प्रदर्शन राजधानी जयपुर का रहा है, जहां अकेले 322 करोड़ रुपये के बिल बकाया हैं.
6 महीने में बिल, फिर पेनल्टी क्यों?
फील्ड इंजीनियर्स और बिलिंग कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उन्हें 6-6 महीने तक बिल नहीं मिलते. जब बिल आता है, तो वह इतनी बड़ी राशि का होता है कि उसे एक साथ चुकाना मुश्किल हो जाता है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग की देरी के बावजूद बिलों पर पेनल्टी (जुर्माना) थौंपी जा रही है, जिसका बोझ आम जनता पर पड़ रहा है.
मंत्री की सख्ती और राहत की मांग
PHED मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए इंजीनियर्स को वसूली के लिए सख्त हिदायत दी है. साथ ही, यह मांग भी उठ रही है कि विभाग अपनी गलती सुधारे और देरी से आने वाले बिलों से पेनल्टी हटाकर उपभोक्ताओं को राहत दे.
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