&w=896&h=504&format=webp&quality=medium)
Rajasthan Politics: राजस्थान में दागी नेताओं के खिलाफ न्यायालय सख्त रुख अपना रहा है. हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, इन नेताओं को कहीं से भी राहत नहीं मिल रही है. इनमें दो वर्तमान विधायक और दो पूर्व विधायक शामिल हैं. इसके अलावा, पूर्व मंत्री महेश जोशी का मामला भी इस सूची में शुमार है.
राजस्थान में भ्रष्टाचार और दंगा भड़काने के आरोपों में घिरे नेताओं के खिलाफ मंगलवार को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया. पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले और आरएलपी के तत्कालीन दो विधायकों द्वारा भीड़ उकसाकर दंगा भड़काने के केस में कोर्ट ने कड़ा रुख दिखाया.
इसके अलावा, एक मौजूदा विधायक के मार्कशीट में हेराफेरी कर जिला परिषद चुनाव लड़ने के मामले में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अच्छा आचरण या विधायक होने मात्र से सरकार को केस वापस लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती. शुक्रवार को हाईकोर्ट ने महेश जोशी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मंत्री होने के नाते उनकी जिम्मेदारी अधिक थी. वहीं, आरएलपी के दो पूर्व विधायकों के खिलाफ केस वापस लेने की राज्य सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या सरकार अब भी इन मामलों को वापस लेना चाहती है.
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मंगलवार को भारत आदिवासी पार्टी के बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी, जिसके बाद उनके खिलाफ केस चल सकेगा. मई में पटेल को 20 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में उनके चचेरे भाई विजय पटेल उर्फ विक्की को भी गिरफ्तार किया गया था, जबकि निजी सचिव रोहित मीणा पैसे से भरा बैग लेकर फरार हो गया था.
राजस्थान हाईकोर्ट ने 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मंत्री के रूप में लोक सेवक होने के नाते जोशी की जिम्मेदारी अधिक थी, और इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों के बयानों में उनकी संलिप्तता का उल्लेख किया गया है. न्यायाधीश प्रवीर भटनगार ने जोशी की जमानत याचिका पर यह निर्णय सुनाया.
राजस्थान हाईकोर्ट ने 10वीं कक्षा की मार्कशीट में हेराफेरी कर जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने के मामले में विधायक हरलाल सहारण के खिलाफ दर्ज केस को वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया. कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक पद और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़े अपराध में केवल अच्छी छवि या विधानसभा सदस्य होने के आधार पर केस वापस नहीं लिया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायाधीश जे.के. माहेश्वरी और विजय बिश्नोई शामिल थे, ने मंगलवार को राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करे कि क्या वह तत्कालीन विधायकों पुखराज गर्ग और इंदिरा बावरी के खिलाफ चार साल पुराने केस को वापस लेने के मामले में अब भी सुनवाई चाहती है. यह मामला 25 अगस्त 2019 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई घटना से संबंधित है, जिसमें भीड़ ने प्रशासन और पुलिस टीम पर हमला किया था, जिसके परिणामस्वरूप जेसीबी चालक फारूक खान की मौत हो गई थी. इस घटना में दोनों तत्कालीन विधायकों को आरोपी बनाया गया था.
राजस्थान की ताज़ा ख़बरों के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहां पढ़ें Rajasthan News और पाएं Jaipur News हर पल की जानकारी. राजस्थान की हर खबर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार. जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!