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Rajasthan Politics: पूर्व मुख्यमंत्री अशाेक गहलोत ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला. गहलोत ने राहुल गांधी की प्रेसकांफ्रेंस ही कई मामलों में बीजेपी नेताओं को जमकर घेरा. गहलोत ने यहां तक कहा कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष होने के नाते जनता के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन मीडिया बोल नहीं रहा, चुप है. लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है. बीजेपी वाले देश को लूट रहे हैं और सब लोग तमाशा देख रहे हैं. एक दिन ऐसा आएगा जब जनता जागेगी और बीजेपी को सबक सिखाएगी.
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को मीडिया से रूबरू हुए. उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि संवैधानिक क्रेडिबल संस्थाओं की क्रेडिबिलिटी बनी रहे, चाहे ED, सीबीआई हो या इलेक्शन कमीशन हो, क्योंकि इन पर ही पूरे देश का भविष्य टिका हुआ है. चुनाव कमीशन के साथ तो देश में लाेकतंत्र का फ्यूचर जुड़ा हुआ है.. राहुल गांधी ने जो मामला उठाया और कहा एटम बम है,, एटम बम की एक जगह ही होती है. लेकिन इसका असर 140 करोड़ की आबादी पर पड़ रहा है.
डेमोक्रेसी कहां रहेगी अगर इसमे इस तरीके का काम होगा, राहुल गांधी ने देशवासियों को सचेत किया है. राहुल गांधी का कल का प्रजेंटेशन मामूली नहीं था एक प्रकार से मैसेज देना था की किस प्रकार से लीकेज हो रही है या क्रेडिबिलिटी कम हो रही है इलेक्शन कमीशन को चाहिए था.
केंद्र सरकार का खेल, CJI काे हटाकर खुद शामिल हो गए शाह ...
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जिस प्रकार से खेल हुआ और 4 दिन में नया कानून बन गया और अमित शाह उसके लिए लग गए . अब CJI को हटाकर अगर गृहमंत्री अमित शाह को लगाएंगे, तो लोग क्या सोचेंगे.. यह संदेह दिल में पैदा हो गया और उसी दिन से इलेक्शन कमीशन का रवैया बदला हुआ है. इलेक्शन कमीशन पर कोई पक्षपात का आरोप भी लगता था तो आयोग को क्लीयर करता था.
राहुल गांधी तो देश के नेता प्रतिपक्ष है वो आरोप लगा रहे हैं और आप कहते कि हम इसकी पड़ताल कर लेंगे तो लगता कि आप ईमानदारी से कम कर रहे हैं. राहुल गांधी क्या शपथ पत्र देंगे वह तो खुद संवैधानिक पद पर बैठे हैं इलेक्शन कमिशन में अगर साहस है तो वह शपथ पत्र जारी करें कि इसमें कोई भी गलत काम नहीं हुआ है . क्या इलेक्शन कमीशन दे सकता है शपथ पत्र पूरा देश चिंतित है.
RSS बीजेपी आजादी के आंदोलन से गायब रहे.
अशोक गहलाेत ने कहा कि आरएसएस और बीजेपी से क्या उम्मीद करें क्योंकि आज के दिन जब भारत छोड़ो आंदोलन दिवस था वह दिन में भी गायब हो गए थे. इनका कोई भरोसा नहीं है लोकतंत्र को लेकर उनकी कोई चिंता नहीं है . इलेक्शन कमीशन वही कर रहा है जो बीजेपी चाहती है . आजाद होने के बाद में जब संविधान बना तो पहले दिन से ही महिला पुरुष किसी भी जाति धर्म का हो सबको एक वोट का अधिकार दिया था.
अमेरिका को 150 साल लगे जो बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है 150 साल लगे रंगभेद दूर करने में कांग्रेस का नेतृत्व तथा गांधी का नेतृत्व तथा पहले दिन से जिस दिन से संविधान लागू हुआ तब से हर किसी को एक वोट का अधिकार सम्मान दिया गया. यह पहचान है देश की मुल्क की आजाद होते ही समान अधिकार दिया. विकसित राज्य इंग्लैंड भी नहीं दे पाया.
चुनाव आयाेग की साख गिरी, निष्पक्ष नहीं रहा ...
गहलाेत ने कहा कि दुर्भाग्य है? कि हमारे इलेक्शन कमिशन की जो साख थी और दूसरे देश उसका सहयोग लेते थे चुनाव के लिए क्या आज वह साख बची है? Sir को लेकर सुप्रीम कोर्ट कैसे कमेंट कर रहा है? यह दुनिया देख रही है? एक जमाना था जब चुनाव का प्रशिक्षण देते थे हमारे अधिकारी लेकिन आज वह क्रेडिबिलिटी समाप्त हो रही है. इलेक्शन कमिश्नर यह कहे कि मैं किससे मिलूंगा यह मैं पहली बार देख रहा हूं.
उनकी टोन ठीक नहीं थी .
इलेक्शन कमीशन को निष्पक्ष होना चाहिए कोई भी पार्टी के लोग आए उनकी बात सुन ले जवाब नहीं देना है? तो ना दे या बाद में दे दे कानून देखकर जवाब लेकिन दुर्व्यवहार करे कि कौन अंदर आएगा कौन नहीं आएगा. यह भाषा भी अपने आप में संदेश देती है? कि इलेक्शन कमीशन निष्पक्ष नहीं है. चार राज्यों की वेबसाइट नहीं खुल रही. गहलोत ने कहा कि राजस्थान बिहार महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश चार राज्यों की वेबसाइट नहीं खुल रही है, हो सकता है कि मेरी प्रेस कांफ्रेंस के बाद खोल दें. अभी तो नहीं खुल रही है इसका मतलब वह सुधार कर रहे होंगे .
ट्रम्प के मामले में ये बोले गहलोत ...
पूर्व सीएम ने कहा कि ट्रम्प के मामले में देश की कभी किसी देश की हिम्मत नहीं होती थी कि वह सरकार या हिंदुस्तान के बारे में ऐसी सोच भी रखे. यह हिंदुस्तान वह है जिसने 1981 में ही जवाब दिया अमेरिका को सातवां बेड़ा आ गया था अब जो चारों ओर से घिर रहे हो, चारों ओर से अकेले पड़ गए हो चीन पाकिस्तान एक हो गए हैं . पाकिस्तान के साथ तुर्की भी आ गया चीन भी आ गया अमेरिका भी उनके साथ ही था. चाहे डायरेक्टर या इनडायरेक्ट, उनका बिजनेस इंटरेस्ट हो या कोई भी हो रूस जो हमारा मित्र था वह भी चुप था.
दुनिया के किसी भी मुल्क ने भारत को लेकर कोई कमेंट नहीं किया जब युद्ध चल रहा था, आतंकवादी हमले पर तो हर किसी को निंदा करनी ही पड़ती है लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के समय आगे अगर कोई खड़ा नहीं हुआ कि आप सही नहीं हो तभी आप ट्रंप की हिम्मत हो रही है. कितना कर रहे हैं कि 25% की धमकी और फिर 25 से सीधा 50 और फिर बोल रहे हैं कि मैं कुछ भी कर सकता हूं देश का इकबाल मजबूत रहे यह हम सब की प्रार्थना है वह देश के लिए कोई भी स्टेप बताएं.