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Rajasthan Politics : देश प्रदेश में कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाकर आने वाले असेंबली इलेक्शन में चुनावी वैतरणी पार करने की जुगत में है, इसके लिए पार्टी ने तमाम बूथों पर बीएलए की नियुक्ति की कवायद शुरू की हुई है, ताकि जब एसआईआर में वोटरों को जोड़ने और हटाने पर काम शुरू हो, तो बीएलए पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से निगाह रख सके. कांग्रेस के पार्टी इसके लिए बाकायदा वॉर रूम से रोजाना मॉनिटरिंग कर रही है. पर कई नेता ऐसे हैं. जिन पर पार्टी के दिशा निर्देशों को अभी तक गंभीरता दिखाना तो दूर किसी तरह की दिलचस्पी भी नहीं दिखाई है. ऐसे ही कई नेताओं को पिछले दिनों सुखजिंदर सिंह रंधावा और गोविंद डोटासरा कड़ी फटकार लगा चुके हैं. इसके बावजूद हालात जस के तस है.
कौन कौन कर रहा कांग्रेस में नाफरमानी
धीरज गुर्जर जहाजपुर भीलवाड़ा से पूर्व विधायक प्रियंका गांधी के करीबी और वर्तमान में एआईसीसी सचिव
दिव्या मदेरणा पूर्व विधायक दिग्गज कांग्रेस नेता परसराम मदेरणा की पौत्री और पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा की बेटी
दानिश अबरार सवाईमाधोपुर के पूर्व विधायक
इन तीनों नेताओं ने बीएलए बनाने में अब तक पार्टी की रिपोर्ट में कहीं कोई रूचि नहीं दिखाई है, तो दिग्गज कांग्रेस नेता शांति धारीवाल, विधायक रतन देवासी और विधायक समरजीत सिंह की परफोरमेंस भी कोई खास नहीं है. देवली उनियारा जैसी सीटों पर पार्टी का कोई धणी धोरी ही नहीं है. जिन नेताओं के कंधों पर जिम्मेदारी है, वो पार्टी के आदेशों को किसी भी सूरत में मानने तक को तैयार ही नहीं है, हालात ये हैं कि पीसीसी के दफ्तर से लगातार फोन जाने के वावजूद पार्टी आलाकमान के आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है, इस कड़ी में प्रताप सिंह खाचरियावास की परफोरमेंस भी अब जाकर थोड़ी बेहतर हुई है. दिनरात की मेहनत के बावजूद खाचरियावास जैसे नेताओं को बीएलए बनाने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा है.
राज्य में कुल बावन हजार बूथ हैं. संगठन सृजन अभियान के तहत कांग्रेस पार्टी ने हर बूथ पर अपना एजेंट खड़ा कर स्पेशल इंटेशिव रिवीजन की अभी से तैयारी शुरू कर दी है, राहुल गांधी के निर्देशों के बाद पार्टी का दावा है कि अब तक करीब छियालीस हजार बूथों पर बीएलए की नियुक्ति की जा चुकी है. बीएलए की रेस में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही लगभग बराबर दौड़ लगा रहे है. ये पहला मौका है,जब कांग्रेस ग्रास रूट अपनी विचारधारा से जुड़े वोटर का वोट बचाने के लिए इस तरह की तैयारी करती दिखाई पड़ रही है.
बहरहाल ,चुनाव आयोग की वेबसाइट पर बीएलए का डेटा लगातार अपडेट हो रहा है, माना जा रहा है कि चुनाव आयोग अगले महीने से राजस्थ्ज्ञान में एसआइ्आर पर काम शुरू करेगा, पर दिग्गज कांग्रेस नेता हाथ पर हाथ धरे बैठे है. इससे प्रदेश नेतृत्व पर दबाव बढ़ रहा है.,वोट चोरी के आरोप लगाकर बीजेपी को कटघरे में खड़े करने वाली पार्टी आखिर कैसे एसआईआर पर बीजेपी की तैयारियों का मुकाबला कर पायेगी. इसे लेकर पार्टी के थिंक टैंक अभी से चिंता में डूब रहे हैं. आखिर प्रदेश नेतृत्व की मेहनत के बावजूद पार्टी गुटबाजी का कोई तोड़ नहीं निकाल पाई है.
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