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Dotasara VS Devnani: गोविंद डोटासरा और वासुदेव देवनानी के बीच रिश्ते सामान्य होते दिखाई नहीं दे रहे. डोटासरा की देवनानी पर की गई टिप्पणियों के बाद रिश्तों में खटास और ज्यादा बढ़ गई है. आखिर एक दौर में एक-दूसरे का सम्मान करने वाले डोटासरा और देवनानी के बीच रिश्तों में तल्खी मर्यादा की हदों को कैसे पार कर गई हैं.
फरवरी से चल रही है लड़ाई!
इसी साल फरवरी महीने में विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था. अचानक सत्तापक्ष एवं विपक्ष के बीच उस वक्त तकरार हो गई, जब मंत्री अविनाश गहलोत ने इंदिरा गांधी को लेकर अमर्यादित टिप्पणी कर दी. विधानसभा में पक्ष-विपक्ष आमने-सामने हो गए और नौबत हंगामे और शोर-शराबे से आगे टकराव तक पहुंच गई. स्पीकर ने डोटासरा समेत छह कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया. निलंबित विधायकों ने विधानसभा में जबरन घुसने की भी कई बार कोशिश की. पर आखिरकार डोटासरा के खेद जताने के बाद मामले के सुलझने के आसार बने.
डोटासरा की टिप्पणी से आहत हुए देवनानी
इसी दौरान गोविंद डोटासरा की ऑफ द रिकॉर्ड की गई टिप्पणी से स्पीकर वासुदेव देवनानी आहत हो गए. देवनानी के आसन से आंसू छलक आए और इस दौरान डोटासरा को लेकर उन्होंने ऐसी बात कह दी, जो अब भी पीसीसी चीफ को सदन से दूर रहने पर मजबूर कर रही है. देवनानी बोले – गोविंद डोटासरा विधायक बनने के लायक नहीं है. इस टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने की कांग्रेस के विधायकों से लेकर खुद गोविंद डोटासरा ने भी कोशिश की, पर देवनानी अपनी जिद पर कायम रहे.
क्या बोले मंत्री मदन दिलावर?
मंत्री मदन दिलावर का मानना है कि डोटासरा उस टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से निकलवाने के लिए स्पीकर पर दबाव बनाने के लिए इस तरह आक्रामक हो रहे हैं. जैसे-तैसे बजट सत्र गुजर गया और इस बार जब मॉनसून सत्र की बारी आई, तो भी डोटासरा के फटकारे ने सदन से दूरी बनाए रखी. पिछले सात महीने से डोटासरा की आवाज सुनने को विधानसभा तरस रही है. हालांकि डोटासरा ने सदन से बाहर रहकर भी सरकार पर पूरा दबाव बनाने की कोशिश की.
निजता के हनन का आरोप
सत्र के आखिरी दौर में विपक्ष ने निजता के हनन के आरोपों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई. जासूरी कैमरों के बहाने विपक्षी सदस्यों की जासूसी करने के आरोप लगाए गए. इस पर सदन में दो दिन तक खासा हंगामा भी बरपा. गतिरोध कायम रहा. यहां तक कि विपक्ष ने सीएम के संबोधन का भी बहिष्कार कर दिया. जब विधानसभा का सत्र खत्म हो गया, तो पीसीसी में मीडिया से बात करते हुए डोटासरा स्पीकर पर गुस्सा हो गए. तैश में डोटासरा ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं. आसन पर निशाना साधते हुए डोटासरा इतना कुछ बोल गए, जितना आज तक आसन के खिलाफ बोलने की कोई हिम्मत नहीं कर पाया.
स्पीकर ने भी तोड़ी चुप्पी
स्पीकर देवनानी ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी. डोटासरा का नाम लिए बगैर देवनानी ने सोशल मीडिया पर लिखा – 'जांकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी.' देवनानी का एक्स से लेकर स्क्रीनशॉट चलाए गए. बहरहाल, पूरे प्रदेश में भाजपा के कार्यकर्ता डोटासरा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. उनके खिलाफ जमकर नारेबाजियां हो रही हैं और पुतले तक फूंके जा रहे हैं. पर इन सबसे बेफिक्र डोटासरा अगले सत्र में स्पीकर देवनानी के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुटे हैं.
स्पीकर हैं अडिग
स्पीकर देवनानी अपने फैसले पर कायम हैं और उस टिप्पणी को कार्यवाही से नहीं हटाने पर अडिग. जाहिर है, एक-दूसरे का सम्मान करने वाले दोनों नेताओं की वक्त ने ऐसी दूरियां बना दी हैं, जिसके बारे में कोई कल्पना तक नहीं कर सकता था. अब उम्मीदें अगले सत्र से हैं. तब तक सदन की लड़ाई सड़कों पर इसी तरह से लड़ी जाती रहेगी. वक्त ही इसका हल ढूंढ पाएगा.
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