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Rajasthan Politics: राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने राहुल गांधी और विपक्ष के द्वारा भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर वोट चोरी करने के आरोप लगाने के बाद अपने विरोध प्रदर्शन में पुलिस के द्वारा सभी को गिरफ्तार कर लेने के बाद ट्वीट कर इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं. जिसके अंदर उन्होंने लिखा है कि अगर आयोग जांच नहीं करवाएगा तो देश की आमजन में इनके प्रति विश्वास खत्म हो जाएगा.
क्या लिखा पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पूर्व सीएम ने लिखा कि, 'वोट चोरी के विरोध में मार्च निकाल रहे कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा जी समेत अन्य सांसदों को हिरासत में लिया जाना बेहद निंदनीय एवं लोकतंत्र पर कुठाराघात है. डेमोक्रेसी में विपक्ष को अपनी बात उठाने का अधिकार है और प्रदर्शन, मार्च इत्यादि के जरिए ही वो अपने मुद्दों पर जनता की आवाज को बुलंद करते हैं. प्रदर्शन करते नेताओं को हिरासत में लेना उनके इस अधिकार का हनन है. केन्द्र सरकार एवं चुनाव आयोग श्री राहुल गांधी द्वारा तथ्यों के साथ लगाए गए वोट चोरी के आरोप की जांच करने की बजाय ध्यान भटकाने के लिए दूसरे रास्ते अपना रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष तो क्या किसी आम आदमी या मीडिया संस्थान द्वारा भी इतनी बड़ी अनियमितताएं सामने लाने पर चुनाव आयोग का कर्तव्य है कि उनकी जांच करवाए पर चुनाव आयोग का ऐसा रुख इस संस्था में आमजन के विश्वास को खत्म कर रहा है.'
क्या था पूरा मामला?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में भारतीय चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हुई कथित अनियमितताओं - विशेषकर ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने माना कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची एवं वोटिंग डेटा से जुड़े विभेद स्पष्ट रूप से दिखते हैं, जो चुनाव आयोग (ईसी) द्वारा संवैधानिक प्रक्रियाओं में गड़बड़ी का संकेत देते हैं. इन आरोपों में कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 वोटों की गड़बड़ी का भी उल्लेख है, जिसमें फर्जी पते, डुप्लिकेट मतदाता और फॉर्म-6 के दुरुपयोग शामिल हैं. राहुल गांधी का यह भी दावा है कि ईसी भाजपा को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से मतदान के जरिए भारतीय लोकतंत्र के साथ विध्वंस कर रहा है.
सीसीटीवी फुटेज जारी नहीं करना गंभीर समस्या
राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए यह भी बोला कि चुनाव आयोग द्वारा मशीन-रीडेबल मतदाता सूची और मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज नहीं जारी करने को भी गंभीर समस्या है, और इसे प्रमाणों को छिपाने का प्रयास भी किया जा रहा है. राहुल गांधी के आरोपों ने विपक्षी राजनीतिक दलों में समर्थन भी पाया—जैसे शशि थरूर ने ईसी को शीघ्र जवाब देने की अपील की और यह प्रश्न उठाया कि लोकतंत्र को बचाने के लिए ऐसे संदेहों पर जवाबदेही कितनी जरूरी है.
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
वहीं चुनाव आयोग ने इन आरोपों को "बेज आधार" और "हर रोज उठ रहे अविवेकी बयान" करार देते हुए राहुल गांधी को प्रमाण या शपथ-पत्र देने का निर्देश दिया. आयोग ने कहा कि यदि वो अपने दावों पर दृढ़ हैं, तो सबूत पेश करें, अन्यथा देश से माफी मांगे. तो वहीं बीजेपी नेताओं ने इस मुद्दे को कांग्रेस का निराशाजनक चुनाव परिणामों पर अफसोस व्यक्त करने की रणनीति बताया है, और इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है.