मेवाराम जैन ने थामा कांग्रेस का दामन, हरीश चौधरी ने खोला मोर्चा

Rajasthan Politics: जयपुर में मेवाराम जैन की कांग्रेस में फिर से वापसी हो गई. कथित अश्लील सीडी कांड में बरी होने के बाद मेवाराम की वापसी का पहले ही रास्ता साफ हो गया था.

मेवाराम जैन ने थामा कांग्रेस का दामन, हरीश चौधरी ने खोला मोर्चा
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Rajasthan Politics: राजस्थान के जयपुर में मेवाराम जैन की कांग्रेस में फिर से वापसी हो गई. कथित अश्लील सीडी कांड में बरी होने के बाद मेवाराम की वापसी का पहले ही रास्ता साफ हो गया था. इससे एक ओर मेवाराम समर्थकों में खुशी की लहर है. वहीं उनके धुर विरोधी हरीश चौधरी उनकी वापसी को स्वीकार करने के कतई मूड में नहीं है.

मेवाराम जैन की खुशी का ठिकाना नहीं है. जैसे ही उनकी कांग्रेस में वापसी हुई उनके समर्थकों में जबरदस्त जोश देखा जा रहा है. बाड़मेर के गली चौराहों पर आतिशबाजियां हो रही हैं. लोग एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर बधाईयां दे रहे हैं. मेवाराम जैन खुशी के मारे फूले नहीं समा रहे.

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मेवाराम जैन बाड़मेर से 3 बार विधायक रह चुके हैं. करीब 5 दशक से वो कांग्रेस पार्टी में सक्रिय हैं, लेकिन इस बार उनकी पार्टी में वापसी इतनी आसान नहीं थी. एक तरफ कथित तौर पर अश्लील सीडी में उनका नाम आने पर कांग्रेस ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया.

वहीं दूसरी तरफ हरीश चौधरी जैसे दिग्गज नेता उनकी वापसी की राह में सबसे बड़ी बाधा बने हुए थे, लेकिन जैसे ही न्यायालय से मेवाराम जैन के पक्ष में फैसला आया. तमाम विरोधियों का विरोध धरा का धरा रह गया. पार्टी ने इस दिग्गज नेता को फिर से गले लगा लिया.

मेवाराम जैन की पार्टी में वापसी में सबसे ज्यादा योगदान पूर्व CM अशोक गहलोत ने निभाया. वहीं सुखजिंदर रंधावा जैसे नेताओं का भी उन्हें भरपूर सहयोग मिला. पार्टी ने हरीश चौधरी जैसे नेताओं के विरोध को दरकिनार कर दिया.

हरीश चौधरी समर्थक उनकी घर वापसी को रुकवाने के लिए कई दिनों तक दिल्ली में डेरा डाले रहे, लेकिन उनके प्रयास विफल साबित हुए. अब हरीश चौधरी खुलकर सार्वजनिक मंचों से मेवाराम जैन की कांग्रेस में वापसी के खिलाफ बयान दे रहे हैं.

उन्हेांने तो यहां तक कह दिया कि वो चरित्रहीन ताकतों से कभी संबंध नहीं रखेंगे चाहे राजनीति छोड़कर घर पर ही क्यों न बैठना पड़े. थार के रेगिस्तान में मेवाराम की वापसी से कहीं खुशी है, तो कहीं सन्नाटा पसरा है, यहां एक तरफ जाट, दलित और अल्पसंख्यकों की एकजुटता है.

दूसरी तरफ क्षत्रिय, सवर्ण और ओबीसी की जातियां लामबंद है. मेवाराम समर्थक नाच गाकर हरीश चौधरी समर्थकों को चिढ़ा रहे हैं, तो हरीश चौधरी के समर्थक अपने नेता के साथ एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं.

बाड़मेर में कांग्रेस साफ-साफ दो धड़ों में बंट चुकी है. कार्यकर्ता यहां पार्टी के नहीं बल्कि नेताओं के साथ है. थार के रिश्तों की महक को सियासत की नजर लग गई है. चुनाव में एक ही पार्टी के नेता अपनों को हरा रहे हैं और विरोधी पार्टियों के साथ गुप्त समझौते कर उन्हें जीता रहे हैं.

शिकायतें आलाकमान तक भी जाती हैं पर नतीजा सिफर है. पहले अमीन खान की वापसी हुई और अब मेवाराम के फिर से कांग्रेसी बन जाने से हरीश चौधरी के सामने अपने ही घर में चुनौतियां बढ गई हैं. राहुल गांधी के भले ही वो नजदीक हैं, लेकिन पार्टी आलाकमान ने उनके विरोध को नजरंदाज कर दिया है.

जाहिर है इन चुनौतियों से निपटने के लिए हरीश को नये समीकरण बनाने होंगे, लेकिन मेवाराम जैन ने समाज के बीच पिछले दो साल में अपना मान सम्मान और हैसियत खोई है, उसे क्या वो अगले तीन साल में हासिल कर पाएंगे, ये भी कम बड़ा सवाल नहीं है.

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Aman Singh

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अमन सिंह को डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव है और वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. वे राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं और उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अच्छे तरीके से प्रस्तुत करने में सक्षम हैं. करीब 3 साल के डिजिटल मीडिया अनुभव के साथ अमन ने न्यूज़ प्रोडक्शन, कंटेंट क्रिएशन और स्टोरीटेलिंग में अपनी मजबूत पहचान बनाई है. जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
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