Rajasthan Politics : गहलोत बोले मैं और पायलट कब अलग थे ! क्या सच में ?

Rajasthan Politics : राजनीति में कई तरह की रिवायतें होती है. जिनकी तस्वीरें भी कई दिखती हैं, लेकिन हमेशा जैसा दिख रहा हो वैसा ही हो ये जरूरी नहीं. अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि वो और सचिन पायलट कब अलग थे ? जवाब में सिर्फ मानेसर की यादें ताजा हो जाती हैं.

Rajasthan Politics : गहलोत बोले मैं और पायलट कब अलग थे ! क्या सच में ?

Rajasthan Politics : पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर सचिन पायलट भावुक दिखे और कहा कि उनका बिछुड़ना बहुत दुखदाई है. बहुत लोगों को उनकी कमी खेलती है. मुझे अपने पिता पर हमेशा फख्र रहेगा. उन्होंने फौज में रहकर पाकिस्तान के दांत खट्टे किए. बड़े पद पर रहकर इंसान अपना दामन साफ रख सकता है.. उन्होंने हमेशा हमें यही सीख दी. सचिन पायलट ने कहा कि राजेश पायलट का किरदार मुझे हमेशा प्रेरणा देता रहेगा. उनके विचार मेरे लिए हमेशा आदर्श बने रहेंगे. वंचितों की राजेश पायलट ने हमेशा पैरवी की उन्होंने अपनी जिंदगी लोगों को जोड़ने में लगाई.

मैं और पायलट कब अलग थे- गहलोत
दौसा के भंडाना में हुई राजेश पायलट की श्रद्धांजलि सभा में अशोक गहलोत भी पहुंचे थे. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी गहलोत ने सभा के बारे में लिखा. बाद में जाते जाते मीडिया को गहलोत ने कहा कि -मैं और पायलट कब अलग थे? 'हम तो हमेशा से साथ हैं' 'और दोनों में खूब मोहब्बत भी है' 'ये तो मीडिया चलाता रहता है अनबन की खबरें'.

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पायलट और गहलोत की असहज-सहज मुलाकात
अशोक गहलोत ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा था कि राजेश पायलट 1980 में पहली बार एक साथ लोकसभा पहुंचे थे और लगभग 18 साल तक साथ में सांसद रहे. इधर सचिन पायलट ने भी गहलोत के साथ अपनी मुलाकात की फोटो साझा की और उन्हें दौसा की श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था. वहीं राजेश पायलट की याद में आयोजित प्रार्थना सभा में भीड़ बहुत ज्यादा थी. जहां एक बार अशोक गहलोत में भीड़ में पीछे रह गये तो सचिन पायलट वापस जाकर उन्हे लेकर आए और फिर सभी कांग्रेस नेता एक साथ आगे बढ़ें.

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मानेसर आया याद
गहलोत ने आज कहा कि सचिन पायलट और वो कभी अलग थे ही नहीं, ये सब मीडिया अनबन चलाता रहता है. ऐसे में मानेसर की याद आनी स्वाभाविक है. जब 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कड़ी टक्कर थी. कांग्रेस नेतृत्व ने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री और सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया. लेकिन सरकार बनने के डेढ़ से दो साल के भीतर ही सचिन पायलट ने अपने समर्थक विधायकों के साथ सरकार के खिलाफ बगावत कर दी, जिससे पार्टी के भीतर मतभेद और गहरा गए. सचिन पायलट ने अपने समर्थक विधायकों के साथ मानेसर के एक रिसॉर्ट में डेरा डाल लिया था, जिससे कांग्रेस के भीतर सियासी संकट गहरा गया. कांग्रेस नेतृत्व को इस लड़ाई को सुलझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. इस विवाद का खामियाजा 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भुगतना पड़ा, जब पार्टी राज्य की सत्ता से बाहर हो गई. चुनाव हारने के बाद भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के सियासी रिश्ते सामान्य नहीं हो पाए.

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