Rajasthan Politics: कांग्रेस को पूर्व मुख्यमन्त्री वसुंधरा राजे के बयान में सरकार को घेरने के लिए मुद्दा मिल गया है. ऐसे में पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का बड़ा बयान सामने आया है.
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Rajasthan News: राजस्थान के झालावाड़ में गर्मी की शुरुआत के साथ ही गंभीर पेयजल संकट खड़ा हो गया है. इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जल संकट को लेकर अधिकारियों पर कड़ा हमला बोला और सोशल मीडिया के माध्यम से तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अधिकारी मस्त हैं और जनता त्रस्त है. राजे ने केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के तहत भेजे गए 42 हजार करोड़ रुपये का हवाला देते हुए अधिकारियों से सवाल किया कि झालावाड़ के हिस्से की राशि का क्या हुआ? उन्होंने कहा कि यह स्थिति अप्रैल की है, जून-जुलाई में क्या हाल होगा?
वसुंधरा राजे के इस बयान को कांग्रेस ने तुरंत लपक लिया. पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजे को धन्यवाद देते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा. डोटासरा ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि भाजपा की ही पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी ही सरकार के खिलाफ जनता की आवाज उठानी पड़ रही है. उन्होंने सरकार को पर्ची सरकार बताते हुए कहा कि अफसरशाही हावी है और सरकार की तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित हैं.
टीकाराम जूली ने भी राजे के ट्वीट को भाजपा सरकार की सच्चाई उजागर करने वाला करार दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब खुद पूर्व मुख्यमंत्री को सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है, तो आमजन की स्थिति कितनी खराब होगी. उन्होंने इसे भाजपा की नाकामी का प्रमाण बताया.
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बाद जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने भी स्वीकार किया कि पेयजल आपूर्ति में समस्याएं हैं. हालांकि उन्होंने इस खामी का ठीकरा पिछली सरकार पर फोड़ा और कहा कि आधे से ज्यादा इलाकों में पानी नहीं पहुंच सका क्योंकि पिछली सरकार की योजनाएं ठीक से क्रियान्वित नहीं हुईं.
इस पूरे घटनाक्रम में वसुंधरा राजे के ट्वीट ने एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है, जिसे कांग्रेस ने भुनाने में देर नहीं लगाई. वहीं, सरकार की ओर से भी समस्या को स्वीकारा गया, लेकिन असली सवाल अब भी बरकरार है, जनता को राहत कब मिलेगी और जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी?